ब्लॉगसेतु

मनीष कुमार
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जाड़ों की भली धूप का आनंद पिछले दो हफ्तों से उठा रहे थे कि अचानक उत्तर भारत की बर्फबारी के बाद खिसकते खिसकते बादलों का झुंड यहाँ आ ही गया। धूप तो गई ही, ठंड के साथ ही बारिश की झड़ी भी ले आई। मुझे याद आया कि ऐसे ही मौसम में मैंने कभी जर्मनी के म्यूनिख से आस्ट्रिया के...
मनीष कुमार
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वियना में विमान से सुबह उतरते वक़्त बाहर का तापमान पन्द्रह के करीब बताया गया। हमारा समूह सशंकित था कि राँची और फिर दिल्ली में मई की गर्मी झेलने के बाद अचानक कितनी ठंड का सामना करना पड़ेगा। जो ठंड लगनी थी वो एरोब्रिज के आखिरी छोर पर पहुँचते पहुँचते खत्म हो गयी। वियना...
मनीष कुमार
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आसमान की ऊँचाइयों से नीचे दिखते बादलों के झुंड, डिब्बानुमा शहर, हरे भरे खेत खलिहान, पल पल अपना रास्ता बदलती नदी, पतली सर्पीली सड़कें और उस पर रेंगती गाड़ियाँ देखना विमान यात्राओं में मेरा प्रिय शगल रहा है। पर ये सारी छवियाँ अक्सर मन मस्तिष्क में अंकित हो कर रह जाती ह...