ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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 तुम्हें मालूम है उस दरमियाँ, ख़ामोश-सी रहती कुछ पूछ रही होती है, मुस्कुराहट की आड़ में बिखेर रही शब्द, तुम्हारी याद में वह टूट रही होती है |बिखरे एहसासात बीन रही, उन लम्हात में वह जीवन में मधु घोल रही होती है,  नमक का दरिया बने नयन...
अनीता सैनी
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हिंद की हिंदी के मासूम मर्म  का गुबार, मानव मस्तिष्क  सह न सका, क़दम-दर-क़दम धसाता गया शब्दों को,  बिखर गये भाव पैर पाताल को छूने-से लगे | अस्तित्त्व आहत हुआ हिंदी का, आह से आहतीत बिखरती-सी गयी, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष ...
Ravindra Pandey
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चौड़ी छाती है वीरों की,गगनभेदी हुँकार है...नाम धनंजय, रुद्र, विनोद,करतम, माझी, करतार है...अब तो कोई जतन करे,कोई तो समाधान हो...ऐसा ना हो सुंदर बस्तर,खुशियों का शमशान हो...दारुण दुःख सहते सहते,देखो पीढ़ी गुज़र रही...बारूदों के ढेर में बैठी,साल की बगिया उजड़ रही...तन आहत...
Nitu  Thakur
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मरती है तो मर जाने दो हमें जहाँ की कहाँ पड़ी है पागल है लड़की की माँ जो न्याय की खातिर जिद पे अड़ी है शोक प्रदर्शन खत्म हो चुका अब घरवालों को सहने दो प्रेम नगर के वासी हैं हम प्रेम नगर में रहने दो बहन, बेटियाँ बाजारों में ब...
PRABHAT KUMAR
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आहत मन की करूण वेदना प्रखर हुई है जब जबजागा मैं, आंखे खुली पर छा गयी उदासी तब तबखो दिया किसी अपने को, जैसे ही कुछ करना चाहावीरता का प्रमाण लिए, असमंजता से लड़ना चाहानदियां उफनी, बादल गरजा, छाया तिमिर तिहुँ ओरभावनाओं के वशीभूत है ये, जिंदगी की राह हर ओरवक्त ने सिखाया...
 पोस्ट लेवल : आहत मन चिंतन