ब्लॉगसेतु

मधुलिका पटेल
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मेरे सिरहाने वाली खिड़की तब से मैने ख़ुली ही रख़ी है क्योंकि उसके ठीक सामने चाँद आकर रुकता है एक छोटे तारे के साथ मेरे पास बहुत से सवालोंके नहीं है हिसाबवर्षों से रोज़ रात मेरे सिरहाने बैठ कर बेटी पूछती है "माँ , पापा कभी लौट...
मधुलिका पटेल
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माँ मुझे आज भी तेरा इंतज़ार है पता नही क्यों ?तू आती है मिल्ती है और प्यार भी बहुत करती है तुझे मेरी फिक्र भी है पर मुझे तेरा इतंज़ार है कल कोइ मुझसे पूछ रहा था अरे पागल कैसा तेरा ये इतंज़ार हैमैं तुम्हें नहीं बता सकतीबात बरसों पुरानी...
मधुलिका पटेल
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तूने कभी मुझे चाहा ही नहींपर तूने मुझे प्यार के भ्रमजाल में भरमाया तो सहीतेरी बातें कच्चे रंग सी धुल के निकलीतेरे वादे बिन पानी वाले बादलों से हल्के निकले सच्चे प्यार में तूने वफ़ा की आजमाइश की और तूने बेवफ़ाइ की हद पार की मैने तो अख़िरि सांस तक...
मधुलिका पटेल
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हालातों ने उसकी खुशी कोकही दफ़ना दियाउससे छीन कर उसकी मुस्कुराहट कोकहीं छिपा दियाचाहती थी वो सूरज की किरनों से पहलेदौड़ कर धरा को छू लूगुन-गुनी धूप सी गरमाइशहाथों में हुआ करती थीजाड़े में गुलमोहर के नीचेइंतज़ार खत्म होता थाऔर सर्द हवाओं मेंकाँपते उसके हाथ होते...
Mahesh Barmate
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इंतज़ार...कभी - कभी कितना सुखद होता हैऔर कभी क्यों ये होता है दुःखद ...?गर इश्क़ हो किसी से,तो ये कीचड़ में खिलते कंवल सा होता है...और कभी ये होता है केवल एक गहरा दलदलगर हो ये कोई बस एक ज़रूरत...कभी किसी के इंतज़ार मेंहम बिता देते हैं कई सदियाँतो कभी कटता ही नहींएक...