ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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 दायरे में सिकुड़ रही स्वतंत्रता, पनीली कर सकूँ ऐसा नीर कहाँ से लाऊं ? कविता सृजन की आवाज़  है चिरकाल तक जले,  कवि हृदय में वो आग कैसे जलाऊं ? समझा पाऊँ शोषण की परिभाषा,  ऐसा तर्क कहाँ  से लाऊं  ? स्वार्थ के...
ANITA LAGURI (ANU)
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पूरी पृथ्वी में मानव जाति ही जीवित जीवों में &#23...
अनीता सैनी
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आहत हुए अल्फ़ाज़ ज़माने की आब-ओ-हवा में,  लिपटते रहे  हाथों  में और  सीने में उतर गये, अल्फ़ाज़ में एक लफ़्ज़ था मुहब्बत, ज़ालिम ज़माना उसका साथ छोड़ गया,   मुक़द्दर से झगड़ता रहा ता-उम्र वह,  मक़ाम मानस अपना बदलता गया,&nbs...
विजय राजबली माथुर
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 Kashish News Sep 27, 2018 हमर बिहारसभ्यता की शुरुआत और अंत का मिलनः अनिता गौतमपटनाः कहते हैं सभ्यता की शुरुआत में लोग नंगे रहते थे, इंसान और जानवरों की जिंदगी में कोई फर्क नहीं था। समय के साथ सब कुछ सभ्य और सुव्यवस्थित होता गया। यौन उत्पीडन से बचाव...
PRABHAT KUMAR
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मैं सच में कमाल का इंसान हूं। एक इंसान जिसके लिए नहाना अन्य दूसरे चीजों से भी ज्यादा मायने रखता है। कुछ वाकया बताते हैं....2010 के आस पास की बात है, अपने मित्रों के संग अमृतसर, वाघा बॉर्डर, जलियावालाबाग तक घूमने की योजना बनी। सामान्य यानी कि लोकल डिब्बे में बैठकर स...
विजय राजबली माथुर
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Joy Sengupta01-09-2018 *Statement by Sudha Bharadwaj**Regarding the letter issued to the Press by Pune Police*1. It is a totally concocted letter fabricated to criminalize me and other human rights lawyers, activists and organisations.2. It is a mixture of in...
विजय राजबली माथुर
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Amit Kumar06-07-2018 ·इसी जनवरी में सुधा जी से दिल्ली "प्रेस क्लब" में बड़ी संक्षिप्त सी मुलाक़ात हुई मेरी ।कल जब अर्णव अपनी काली ज़ुबान से tv पर जिसे अर्बन नक्सली बता कर भौंक रहा था , पढ़िए कौन और क्या हैं वो ।साथी  Mahendra Dubey  द्वारा पिछल...
S.M. MAsoom
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अरब मैं जब इस्लाम आया था तो वहाँ ग़रीबी भी थी, जहालत भी थी. हज़रत मुहम्मद (स.अ.व) के किरदार  को उन लोगों ने इतना बुलंद देखा, कि ईमान ले आये, इस्लाम कुबूल कर लिया। इस्लाम हकीकत मैं किरदार की बुलंदी से फैला है और इस सुबूत यह है की हज़रत मुहम्मद (स.अ.व) ने एल...
S.M. MAsoom
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हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक अलैहिस्सलाम मक्का व मदीने के दरमियान का रास्ता तय कर रहे थे। मसादफ़ आप का मशहूर गुलाम भी आप के साथ था कि अस्नाए राह में उन्होंने एक शख़्स को देखा जो दरख़्त के तने पर अजीब अन्दाज़ से पड़ा हुआ था। इमाम ने मसादफ़ से फ़रमाया, उस शख़्स की तरफ़ च...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लcreated by Sanjay Groverहिंदू कि मुसलमां, मुझे कुछ याद नहीं हैहै शुक्र कि मेरा कोई उस्ताद नहीं हैजो जीतने से पहले बेईमान हो गएमेरी थके-हारों से तो फ़रियाद नहीं हैजो चाहते हैं मैं भी बनूं हिंदू, मुसलमांवो ख़ुद ही करलें खाज, मुझपे दाद नहीं हैइंसान हूं, इंसानियत की...