ब्लॉगसेतु

सतीश सक्सेना
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हिंदी जगत में ब्लॉगिंग का आगमन , हिंदी के नवोदित लेखकों के लिए संजीवनी का काम कर गया , झिझकती लड़खड़ाती शर्मीली सैकड़ों कलमें हिंदी की चाल दिखाने के लिए फ्लोर पर पहली बार जब आयीं थी तो उनमें कितनी ही खड़े होने लायक भी नहीं थीं , मगर पाठक रुपी दर्शकों ने वाह वाह कर...
सतीश सक्सेना
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उम्र बढ़ने के साथ नीरसता आनी ही है, मैं ऐसा नहीं मानता !  नीरसता की शुरुआत, जीवन में नयी रुचियों और अपनी इच्छाओं का गला घोटने से होती है और इसके पीछे के कारणों में प्रमुख , बढ़ी उम्र में सामाजिक वर्जनाएं , खुल कर हंसने में भय, अकेलेपन के...
सतीश सक्सेना
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हिंदी साहित्य में ऐसे बहुत कम लोग हैं जो बिना किसी दिखावा शानशौकत के चुपचाप अपना कार्य करते हैं , उनमें ही एक बेहद सादगी भरा व्यक्तित्व अरविन्द कुमार का है जिनको मैंने जितना जानने का प्रयत्न किया उतना ही प्रभावित हुआ !वे मेरठ पोस्ट  ग्रेजुएट &nb...
सतीश सक्सेना
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इस भयावह समय में अपने आप को व्यस्त रखना और मस्त रहना बेहद आवश्यक है , इससे जीवनी शक्ति में ताजगी बनी रहती है , इस शक्ति के आगे कोरोना अपने आपको बहुत कमजोर पाता है और एक सामान्य फ्लू से अधिक नुकसान नहीं कर पाता !  अधिकतर लोग इसे बढ़ाने के लिए खाने पीने...
सतीश सक्सेना
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और अब यह बेहद आसान है अगर दो वर्ष में आप एक बार घर से दूर घूमना चाहते हैं तो कम खर्चे में आप जर्मनी, चेकिया या रोम जा सकते हैं और निश्चित ही यह आपके या परिवार के लिए उत्साहवर्धक एवं आत्मविश्वास बढाने में कामयाब होगा ,बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि यूरोप जाना उतना ही...
सतीश सक्सेना
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जो लोग बरसों से बिना पसीना बहाये, ऐयरकंडीशनर ऑफिस में काम करने के आदी हो गए हैं उन्हें यह जान लेना चाहिए कि उनके शरीर की मसल्स, फेफड़ों के नियमित कार्य , धमनियों में रक्त संचार , हाथ, पैरों, रीढ़, कमर, घुटनों व शरीर के अन्य महत्वपूर्ण जॉइंट्स, बेहद धीमी गति से च...
सतीश सक्सेना
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भारत में आजकल लगभग 40 डिग्री टेम्प्रेचर है और एक नए बने रनर ट्रेनी के लिए इस गर्मी में, लम्बी दूरी दौड़ना केवल एक भयावह सपना होता है , पिछले माह जब मैं जर्मनी आया था तब अगले दिन ही यहाँ के ठन्डे मौसम में, इसार नदी के किनारे दौड़ते द...
सतीश सक्सेना
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नमस्ते सर , अजय कुमार बोल रहा हूँ  ...कल सुबह आपके साथ दौड़ने का मन है, जहाँ कहें वहां आ जाऊंगा ...मेरे साथ अजय कुमार दौड़ेंगे ? क्यों बुड्ढे का मजाक बना रहे हो यार  ...?  और वाकई अजय सुबह सवा पांच बजे फरीदाबाद से चलकर मेरे घर के दरवाजे पर थे !अजय कुमा...
सतीश सक्सेना
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इस हिन्दुस्तान में रहते,अलग पहचान सा लिखना !कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना !दिखें यदि घाव धरती के,वहां ऋणदान सा लिखना घरों में बंद,मां बहनों पे,कुछ आसान सा लिखना !किसी के शब्द शैली को चुरा के मंच कवियों औ , जुगाडू गवैयों,के बीच कुछ प्रतिमान सा लिखना !तेरी...
सतीश सक्सेना
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आज चौथा दिन है पारंपरिक भोजन का त्याग किये , रोटी , दाल , चावल, सब्जियां बंद किये हुए , और आश्चर्य है कि मन एक बार भी नहीं ललचाया और न भूख लगी न कमजोरी ...शायद इसलिए कि अपने आपको चार दिन पहले बे इंतिहा गालियाँ दी थीं , अपना वजन देखने के बाद अगर उस दिन मशीन न देखता...