ब्लॉगसेतु

सुशील बाकलीवाल
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          चर्चगेट, मुंबई से मेरे घर से काम पर जाने के लिये लोकल ट्रेन की यह रोज़मर्रा की यात्रा थी । मैंने सुबह ६.५० की लोकल पकड़ी थी । ट्रेन मरीन लाईन्स से छूटने ही वाली थी कि एक समोसे वाला अपनी ख़ाली टोकरी के साथ ट्रेन...
Kajal Kumar
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Kheteswar Boravat
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विजय राजबली माथुर
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चूंकि सारू स्मेल्टिंग,मेरठ मे फेसिट केलकुलेटर था और मे उसे चला नहीं पाता था अतः जबानी गणना करता था परंतु मुगल आगरा मे इलेक्ट्रानिक केलकुलेटर थे जिन्हें चलाना सीख लिया था। सब लोग दो-दो बार गणना करते थे,लेकिन मैंने एक बार जोड़ते रहकर दूसरी बार नीचे से घटाते जाने की प्...