ब्लॉगसेतु

संतोष त्रिवेदी
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बचपन में बहुत मानता था ईश्वर कोपढ़ते हुए भी कभी नहीं छोड़ा उसेशालिग्राम की बटिया को कराता था स्नान और कंठस्थ कर लिया था सुंदरकांड सुनता था साधुओं के मुख से निकले ब्रह्म-स्वरऔर आनंदित था ‘स्व-धर्म’ में चलते हुए।तब कभी जब डर लगतारात में गाँव वाले पीपल...
दिनेशराय द्विवेदी
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एक अखबार के मालिक हैं। (हालाँकि अखबार की प्रेस लाइन में उनका नाम नहीं जाता, न संपादक के रूप में और न ही किसी और रूप में) विशेष अवसरों पर वे मुखपृष्ठ पर अपने नाम से संपादकीय लिखते हैं। आजकल भी कोविद-19 महामारी एक विशेष अवसर है और वे संपादकीय लिख रहे हैं।आज उन्होंने...
 पोस्ट लेवल : भ्रम ईश्वर Illusion God
mahendra verma
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प्रकृति और उसकी शक्तियाँ शाश्वत हैं । मनुष्य ने सर्वप्रथम प्राकृतिक शक्तियों को ही विभिन्न देवताओं के रूप में प्रतिष्ठित किया । मनुष्य के अस्तित्व के लिए जो शक्तियाँ सहायक हैं, उन को देवता माना गया । भारत सहित विश्व की सभी प्राचीन सभ्यताओं- सुमेर, माया, इंका, हित्त...
Sanjay  Grover
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ईश्वर के होने या न होने पर आपको इंटरनेट पर ख़ूब विचार और बहसें दिखाई देंगे। प्रिंट मीडिया में भी मुख्यधारा के पत्र-पत्रिकाएं न सही, मगर बहुत-से अन्य पत्र-पत्रिकाएं इसपर विचार चलाते रहे हैं।मगर भारतीय फ़िल्में और इलैक्ट्रॉनिक मीडिया !?ज़ाहिर है कि इस मामले में बुरी तर...
Sanjay  Grover
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 महसूस तो करोमैंने उसे ख़ाली कप दिया और कहा,‘‘लो, चाय पियो।’’वह परेशान-सा लगा, बोला, ‘‘मगर इसमें चाय कहां है, यह तो ख़ाली है!’’‘‘चाय है, आप महसूस तो करो।’’‘‘आज कैसी बातें कर रहे हो, मैं ऐसे मज़ाक़ के मूड में बिलकुल नहीं हूं !?’’‘‘मज़ाक़ कैसा ? क्या ईश्वर मज़ाक़ है ?...
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केदारनाथ जलप्रलय ---माता प्रकृति का श्राप एवं जगत पिता द्वारा दिया गया दंड ---      वह सर्वश्रेष्ठ, जगतपिता अपनी सुन्दरतम सृष्टि, प्रकृति के विनाश के लिए अपनी सर्वश्रेष्ठ रचना, अपने पुत्र मानव को भी नहीं छोड़ता उसके अपराधों का दंड देने...
दिनेशराय द्विवेदी
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बचपन में परिवार और समाज का वातावरण पूरी तरह भाववादी था। उस वातावरण में एक ईश्वर था जिस ने इस सारे जगत का निर्माण किया था। जैसे यह जगत जगत नहीं था बल्कि कोई खिलौना था जो किसी बच्चे ने अपने मनोरंजन के लिए बनाया हो। वह अपनी इच्छा से उसे तोड़ता-मरोड़ता, बनाता-बिगाड़ता...
 पोस्ट लेवल : Play Toy ईश्वर खिलौना खेल God
Sanjay  Grover
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ईश्वर को सिद्ध करने में एक वाक्य आलू और पनीर की तरह काम आता है। यह चमत्कारी वाक्य आसानी से कहीं भी घुसेड़ा जा सकता है। एक आदमी सड़क पर निकले और जाकर किसी गाड़ी से टकरा जाए तो कम-अज़-कम चार संभावनाएं हैं-1. आदमी गाड़ी से टकराकर मर जाए-आप आराम से कह सकते हैं-‘ईश्वर क...
Sanjay  Grover
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क्या ईश्वर क़िताबें लिखता है!? हम सब कभी न कभी ऐसे दावों से दो-चार होते रहे हैं। कमाल की बात यह है कि कथित ईश्वर की लिखी और आदमी की लिखी क़िताबों में ज़रा-सा भी अंतर नहीं दिखाई देता। वही पीला क़ाग़ज़, वही काली स्याही ! ईश्वर को लिखनी ही थीं तो ज़रा अलग़ तरह से लिखता कि ग़री...
Sanjay  Grover
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नास्तिकता पर बात करते हुए हिंदू-मुस्लिम की बात क्यों आ जाती है? और यह एकतरफ़ा नहीं है, कथित मुस्लिम कट्टरता पर कोई कुछ कहे तो कुछ लोग संघी घोषित करने लगते हैं, कथित हिंदू रीति-रिवाजों पर कहे तो कुछ दूसरे आरोप और आक्षेप लगने लगते हैं। दूसरों के बारे में दूसरे बत...