ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ की भारत यात्रा का क्या मकसद है, यह किसी ने ज़ाहिर नहीं किया परन्तु जलियांवाला बाग़ की यात्रा करना अवश्य उनकी मानसिकता को उजागर करता है. आख़िरकार जिस देश ने कभी हम पर शासन किया हो और शासन ख़तम हुए भी महज 50 वर्ष बीते हैं, तो कहीं न कहीं महारा...
kumarendra singh sengar
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यदि आज यह सवाल किया जाये तो संभव है कि वह सवाल करने वाले को मूर्ख ही समझे. यह एक कटु सत्य है कि आज से पचास वर्ष पूर्व स्वतंत्र होने के बाद भी हम स्वतंत्र नहीं हैं. यदि ऐसा हो तो सोचने की बात है कि हम परतंत्र किस दृष्टि से हैं. यदि हम अपने जमीर की आवाज़ को सुनकर अपने...
Bharat Tiwari
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शब्द होंगे सम्मानितनई दिल्ली। साहित्य के सम्मान के लिए अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए समाचार पत्र अमर उजाला इस साल से साहित्य अलंकरण अमर उजाला शब्द सम्मान की शुरुआत कर रहा है। इसके तहत सतत रचनात्मकता के लिए हिंदी और एक अन्य भारतीय भाषा में पांच-पांच लाख रुपये क...
kumarendra singh sengar
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फिर भाजपा और सत्ता की भूखी पार्टियों में कोई फर्क नहीं रहेगा +++++++++++++++++++++++++++++++++++++++ तमाम ऊहापोह की स्थिति आत्मविश्वास की कमी के बाद भी गठबंधन प्रत्याशी कृष्णकांत उपराष्ट्रपति के पद पर काबिज हो गए। मोर्चा व कांग्रेस के कुछ सांसद तो निकल भागे पर अंतत...
kumarendra singh sengar
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राष्ट्रपति का चुनाव आम सहमति से नहीं चुनाव द्वारा हो +++++++++++++++++++++++++++++++++++++ देश की मौजूदा स्थिति को देखकर ऐसा लगता है कि सभी दल एक अज्ञात भय से सशंकित हैं। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस, जद हो या सपा, सभी को भय चुनाव का है। इस समय देश में भले ही केन्द्र...
kumarendra singh sengar
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देश में लोकतंत्र के प्रति सभी राजनीतिक दल उदासीन +++++++++++++++++++++++++++++++++अंततः सीताराम केसरी कांग्रेस अध्यक्ष पद पर आसीन हो ही गए। पार्टी में उनकी स्थिति को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा था कि क्या वे इस कुर्सी को प्राप्त कर सकेंगे। बहरहाल अध्यक्ष प...
kumarendra singh sengar
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भारतीय समाज में शिगूफों का कोई अंत नहीं है+++++++++++++++++++++++++++++भारतीय समाज में शिगूफों का कोई अंत नहीं है। कब, कौन, कहाँ पर शिगूफा खड़ा कर दे कहा नहीं जा सकता है। इस मामले में हमारे देश के विशिष्टजन, फ़िल्मी हस्तियाँ और नेतागण काफी उन्नति पर हैं। राजनैतिक पटल...
kumarendra singh sengar
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भारतीय समाज में शिगूफों का कोई अंत नहीं है+++++++++++++++++++++++++++++भारतीय समाज में शिगूफों का कोई अंत नहीं है। कब, कौन, कहाँ पर शिगूफा खड़ा कर दे कहा नहीं जा सकता है। इस मामले में हमारे देश के विशिष्टजन, फ़िल्मी हस्तियाँ और नेतागण काफी उन्नति पर हैं। राजनैतिक पटल...
sanjiv verma salil
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नवगीत:आओ! तम से लड़ें...संजीव 'सलिल'*आओ! तम से लड़ें,उजाला लायें जग में...***माटी माता,कोख दीप है.मेहनत मुक्ताकोख सीप है.गुरु कुम्हार है,शिष्य कोशिशें-आशा खूनखौलता रग में.आओ! रचते रहेंगीत फिर गायें जग में.आओ! तम से लड़ें,उजाला लायें जग में...***आखर ढाईपढ़े न अब तक.अ...
 पोस्ट लेवल : उजाला नवगीत ujala navgeet
Yashoda Agrawal
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मैली चादर को धोया है.हंसते-हंसते वह रोया है.वही काटना सदा पड़ेगा,जीवन में जो कुछ बोया है.आज उसे अहसास हो गया,क्या पाया है क्या खोया है.नब्ज़ समय की पकड़ में आई,शुष्क आंत को अब टोया है.उसकी क्यों कर कमर झुकेगी,जिसने भार नहीं ढोया है.सपनों में चुसका लेने दो,बच्चा रो कर...