ब्लॉगसेतु

पम्मी सिंह
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चित्राभिव्यक्ति रचनासायली छंदमासूमनिगहबान नजरबढाती उम्मीदें, ख्वाहिशेंसीचती मेरीजमीन।पम्मी सिंह 'तृप्ति'2.जख्मवजह बनीप्रेरित करती आत्मशक्ति,सुलझती रहीउलझनें।पम्मी सिंह 'तृप्ति'
जेन्नी  शबनम
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उधार   *******   कुछ रंग जो मेरे हिस्से में नहीं थे   मैंने उधार लिए मौसम से   पर न जाने क्यों ये बेपरवाह मौसम मुझसे लड़ रहा है   और माँग रहा है अपना उधार वापस   जिसे मैंने खर्च दिया उन दिनों   ज...
 पोस्ट लेवल : मौसम उम्मीद ज़िन्दगी
सुमन कपूर
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धुँधली होने लगी हैं उम्मीदें तारीकें भूलने लगी हूँ मैं .. !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : उम्मीद
मुकेश कुमार
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सफ़र के आगाज में मैं था तुम साजैसे तुम उद्गम से निकलती तेज बहाव वाली नदी की कल कल जलधाराबड़े-बड़े पत्थरों को तोड़तीकंकड़ों में बदलती, रेत में परिवर्तित करतीबनाती खुद के के लिए रास्ता.थे जवानी के दिनतभी तो कुछ कर दिखाने का दंभ भरतेजोश में रहते, साहस से लबरेज&nb...
Tejas Poonia
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अगस्त का महीना ऊपर से सावन आ हा ! और ऐसे में एक साथ एक ही दिन तीन-तीन फ़िल्में रिलीज हों और तीनों ही कहानी, अभिनय आदि के मामले में एकदम भिन्न और आला दर्जे की तो ऐसे में वीकेंड शानदार गुजरेगा ही । हालांकि अभिनय और कहानी के मामले में मुल्क बाकि दोनों फिल्मों कारवाँ और...
Yashoda Agrawal
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चल सखी उम्मीद का दीपक जलाते हैं हम हम कदम हम राह बनकर मुस्कुराते हैं न जाने कितने ख्वाब और अरमाँ हैं इस दिल में चल वही अरमाँ तेरे दिल में बसाते हैं कुछ भी नही है पास शब्दों के सिवा मेरे ओठों पे बस जाएं उन्हें ऐ...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
 पोस्ट लेवल : खुशी मदद उम्मीद
Nitu  Thakur
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अंत ही आरंभ है,प्रारंभ करता नवसृजन उद्देश्य की पूर्ति करे, उम्मीद का पुनः जन्म शाश्वत ये सत्य विराठ है, उम्मीद मन सम्राट है आरंभ से पहले है वो , वो अंत के भी बाद है सृष्टि का सृजन हुआ जिस पल जीवन का कोई अर्थ न था क़ुदरत की अद्भुत ...
Mahesh Barmate
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एक अंतहीन सी डोर हैक्या अदृश्य कोई छोर है..?थामे हुए है मुझे और तुम्हेंमिलन की आस हैकैसी ये होड़ है..?दूर हो के भी पास हैंहमें एक दूजे का एहसास हैंहरदम मिलन की आस हैकैसी ये प्यास है..?चाहत और हकीक़तमें छोटा सा फर्क हैगर समझ गए तो जन्नतवरना गर्द है।जीवन की कश्ती मेरीड...
Nitu  Thakur
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गर्म बिस्तर में सुनहरे ख्वाब बुनता है जहाँ सरहदों पर जान की बाजी लगाते नौजवान  जागते है रात भर की जान बचनी चाहिए दुश्मनों से धरती माँ की आन बचनी चाहिए बेरहम मौसम हुआ तो चल पड़ी कातिल हवाएँ बर्फ की चादर लपेटे ज़िंदगी से खेलने चुभ रहे...