ब्लॉगसेतु

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--आँख जब खोली जगत में, तभी था मधुमास पाया।चेतना मन में जगाने, जन्मदिन फिर आज आया।।--हूँ पुराना दीप, लेकिन जल रहा हूँ,मैं समय के साथ, फिर भी चल रहा हूँ,पर्वतों को काट करके, रास्ता मैंने बनाया।चेतना मन में जगाने, जन्मदिन फिर आज आया।।--था कभी शोला, अभी शबनम हुआ,स...
मुकेश कुमार
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तेज धड़कनों का सचसमय के साथ बदल जाता हैकभी देखते हीया स्पर्श भर सेस्वमेव तेज रुधिर धारबता देती थीहृदय के अलिंद निलय के बीचलाल-श्वेत रक्त कोशिकाएं भीकरने लगती थी प्रेमालापवजह होती थीं 'तुम'इन दिनों उम्र के साथधड़कनों ने फिर सेशुरू की है तेज़ी दिखानीवजह बेशकदिल द मामला...
सुमन कपूर
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.............  सोचते सोचते यूँ ही  उम्र गुजर जाएगी कर्मों के निशां रह जायेंगे जिन्दगी फ़ना हो जाएगी !!सु-मन
 पोस्ट लेवल : उम्र जिंदगी
Kailash Sharma
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मत बांटो ज़िंदगीदिन, महीनों व सालों में,पास है केवल यह पलजियो यह लम्हाएक उम्र की तरह।****रिस गयी अश्क़ों मेंरिश्तों की हरारत,ढो रहे हैं कंधों परबोझ बेज़ान रिश्तों का।****एक मौनएक अनिर्णयएक गलत मोड़कर देता सृजितएक श्रंखलाअवांछित परिणामों की,भोगते जिन्हें अनचाहेजीवन पर्य...
मधुलिका पटेल
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चाँदनी रात के साये में जागते और भागते लोग आँखों में नींद कहाँ है सपने आँखों से भी बड़े हैं न नींद में समाते न आँखों को आराम पहुँचाते आज की रात खत्म होती नहीं उससे पहले कल का दामन थामने की जल्दी ज़िन्दगी ने तो जैसेजद्दो - ज...
Pratibha Kushwaha
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बारह हजार करोड़ की रेमंड ग्रुप के मालिक 78 वर्षीय विजयपत सिंघानिया एक-एक पैसों के लिए मोहताज हो गए। उनके बेटे गौतम ने उन्हें न केवल घर से बेदखल कर दिया बल्कि गाड़ी व उनका ड्राइवर तक छीन लिया। मजबूर होकर विजयपत को बाम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करके मुंबई स्थित एक घर...
मधुलिका पटेल
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एक उम्र जो गुम हो गई आज बहुत ढूंढा मैंनेअपनी उम्र को पता नहीं कहाँ चली गई नहीं मिलीरेत की तरह मुट्ठी से फिसल गईया रेशा रेशा हो कर हवा में उड़ गईबारिश की बूँद की तरहमिट्टी में गुम हो गईसूरज की किरणों के साथपहाड़ों के पीछे छिप गईवो मुझे जैसे छू...
मुकेश कुमार
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तुम और मैं चश्मे की दो डंडियाँ निश्चित दूरी पर खड़े, थोड़े आगे से झुके भी !जैसे स्पाइनल कोर्ड में हो कोई खिंचाव कभी कभी तो झुकाव अत्यधिक यानी एक दूसरे को हलके से छूते हुए सो जाते हैं पसर कर यानी उम्रदराज हो चले हम दोनोंहै न सहीचश्मे...
मधुलिका पटेल
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वह छत के कोने में धूप का टुकड़ा बहुत देर ठहरता है उसे पता हैअब मुझे काफी देर यहीं वक़्त गुज़ारना है क्योंकि वह शाम की ढलती धूप जो होती है उम्र के उस पड़ाव की तरह और मन डर कर ठहर जाता है ठंडी धूप की तरहजब अपने स्वयं के ल...
मुकेश कुमार
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उम्र की एक निश्चित दहलीजपार कर चुकी खुबसूरत महिलायें!!उनके चेहरे पर खिंची हलकी रेखाएंऐसे जैसे ठन्डे आस्ट्रेलिया के'डाउंस' घास के मैदान मेंकुछ पथिक चलते रहेऔर, बन गयी पगडंडियाँढेरों, इधर उधरपथिकों की सुविधानुसार !!चलते चलते थकी भी, रुकी भीअपने पैरों पर चक्करघिन्नी क...