एक रचना:उल्लू उवाचमुतके दिन मा जब दिखो, हमखों उल्लू एक.हमने पूछी: "कित हते बिलमे? बोलो नेंक"बा बोलो: "मुतके इते करते रैत पढ़ाई.दो रोटी दे नई सके, बो सिच्छा मन भाई.बिन्सें ज्यादा बड़े हैं उल्लू जो लें क्लास.इनसें सोई ज्यादा बड़े, धरें परिच्छा खास.इनसें बड़े निकालते पेपर...
 पोस्ट लेवल : उल्लू उवाच हास्य