एक गीत-वासंती पाठ पढ़े मौसमनयनों केखारे जल सेभींग रहे अँजुरी में फूल ।वासंतीपाठ पढ़े मौसमपरदेसी राह गया भूल ।भ्रमरों केघेरे में धूपगाँठ बँधी हल्दी से दिन,खिड़की मेंझाँकते पलाशफूलों की देह चुभे पिन,माँझी केसाथ खुली नावधाराएँ,मौसम प्रतिकूल ।सपनों मेंखोल रहा कौनचिट्ठी मे...