चित्र-साभार गूगलएक गीत-मौसम का बासीपन टूटेहँसनाहल्की आँख दबाकरमौसम का बासीपन टूटे ।हलद पुतीगोरी हथेलियोंसे अब कोई रंग न छूटे ।भ्रमरों केमधु गुँजन वालेआँगन में चाँदनी रात हो,रिश्तों मेंगुदगुदी समेटेबच्चों जैसी चुहुल,बात हो,अर्घ्य जलेतुलसी चौरे परकोई मंगल कलश न फूटे...