ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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दिल में आजकल एहसासात का  बे-क़ाबू तूफ़ान आ पसरा है, शायद उसे ख़बर है कि आजकल वहाँ आपका बसेरा है।ज़िन्दगी में यदाकदा ऐसे भी मक़ाम आते हैं, कोई अपने ही घर में अंजान  बनकर सितम का नाम पाते हैं।कोई किसी को&nbs...
अनीता सैनी
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 तुम्हें मालूम है उस दरमियाँ, ख़ामोश-सी रहती कुछ पूछ रही होती है, मुस्कुराहट की आड़ में बिखेर रही शब्द, तुम्हारी याद में वह टूट रही होती है |बिखरे एहसासात बीन रही, उन लम्हात में वह जीवन में मधु घोल रही होती है,  नमक का दरिया बने नयन...