ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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लघुकथा-औरतों की उन्नति*अपने लेखन की प्रशंसा सुन मित्र ने कहा - 'आप सबसे प्रशंसा पाकर मन प्रसन्न होता है किंतु मेरे पति प्राय: कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करते। मेरा ख़याल है कि उन्हें मेरा लिखना पसंद नहीं है परन्तु आप कहते हैं कि ऐसा नहीं है। यदि उन्हें मे...
kavita verma
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सड़क के मोड़ पर उस पेड़ के नीचे फिर मेरी अभ्यस्त नज़र चली गई और उसे वहाँ ना देख अनायास पैर पर जोर पड़ा और बाइक को ब्रेक लग गया। ऐसा तो पिछले चार महीनों में कभी नहीं हुआ था जो मैंने आज देखा। हैरानी तो हुई ही नज़रें उसे आसपास ढूंढने लगीं। पीछे मुड़ कर पेड़ों की कतार के नीचे...
 पोस्ट लेवल : सामराज बूढ़ी औरत
Tejas Poonia
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किताब - ऐसी-वैसी औरत विधा - कहानी संग्रह लेखिका - अंकिता जैन प्रकाशक - हिंद युग्ममूल्य -115 रुपए समीक्षक - तेजस पूनिया आप साहित्य पढ़ते हों। उसमें भी यदि आपकी रुचि हिंदी साहित्य की कहानियाँ, उपन्यास पढ़ने में हो तो मैं आपसेबेझिझक और खुल कर कहूँगा ‘ऐसी-वैसी औरत’ अंकित...
विजय राजबली माथुर
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Sanjay  Grover
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मैं तब के वक़्त को याद करना चाहता हूं जब मेरी मां के मैं और मेरी छोटी बहन बस दो ही बच्चे थे। छोटी बहिन आठ या नौ महीने की और मैं शायद साढ़े तीन या चार साल का था। एक दोपहरबाद मेरी मां रसोई में बैठी जूठे बर्तनों का ढेरा मांज रही थी, मैं उसके पीछे कमरें में बैठा याद नही...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) http://epaper.navbharattimes.com/details/6697-81181-2.htmlनाइश हसन(सामाजिक कार्यकर्ता )मुस्लिम औरतें तीन तलाक के खिलाफ अपने हक की झंडाबरदारी पूरी...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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ये मी टू ले आया रज़ामंदी दोगलापन बीमार ज़ेहन मंज़र-ए-आम पे !वो मर्द मासूम कैसे होगा छीनता  हक़ कुचलता रूह दफ़्नकर ज़मीर !क्यों इश्क़ रोमांस बदनाम मी टू सैलाब लाया है लगाम ज़बरदस्...
पम्मी सिंह
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"बिखरते पलछिन", को प्रतिलिपि पर पढ़ें : https://hindi.pratilipi.com/story/x4ywR76Oj5iv?utm_source=android&utm_campaign=content_share भारतीय भाषाओँ में अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और दोस्तों से साझा करें, पूर्णत: नि:शुल्क
विजय राजबली माथुर
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लखनऊ,  06-05-2018 :कल दिनांक 05 मई 2018 को यू पी प्रेस क्लब, हजरतगंज, लखनऊ में कवि और लेखक कौशल किशोर की दो पुस्तकों  ' वह औरत नहीं महानद थी ' ( कविता संग्रह ) एवं ' प्रतिरोध की संस्कृति ' ( लेखों का संग्रह ) का विमोचन - लोकार्पण तथा समीक्षा कार्यक्रम वरि...
Roli Dixit
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नहीं हूँमैं औरों के जैसी;बस अपने जैसीथोड़ी सी &#23...