एक छोटीसी झोपड़ी थी। उन सबने मिलकर उसका नाम झोपड़ी ही रखा था। शहर और सड़क कही जाने वाली संरचनाओं से बहुत दूर। हमारी परछाईं से भी बहुत दूर। कहीं दिखाई न देने वाली जगह के पास। वहाँ तक जाने वाले रास्ते को वह कितना भी याद करतीं, वह कभी याद नहीं रहता। यह भूल जाने के बाद या...