ककुभ / कुकुभसंजीव*(छंद विधान: १६ - १४, पदांत में २ गुरु)*यति रख सोलह-चौदह पर कवि, दो गुरु आखिर में भायाककुभ छंद मात्रात्मक द्विपदिक, नाम छंद ने शुभ पाया*देश-भक्ति की दिव्य विरासत, भूले मौज करें नेताबीच धार मल्लाह छेदकर, नौका खुदी डुबा देता*आशिको-माशूक के किस्...
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