ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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दैणा होया रे खोली का गणेशा हो सेवा करूंल ।(1-अर्थ= दैणा होया= (कृपा करना),  खोली =(मुख्य द्वार पर स्थापित)2दैणा होया रेपंचनाम देवताअसीक दिया ।( 2- असीक =आशीष)3मेरो पहाड़हरयूँ  छ भरयूँआंख्यों मां  बस्युं ।(3- अर्थ -हरयूँ  छ भरयूँ =ह...
 पोस्ट लेवल : हाइकु कमला निखुर्पा
sanjiv verma salil
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अभिनव प्रयोग-गीत:कमल-कमलिनी विवाहसंजीव 'सलिल'**अंबुज शतदल कमलअब्ज हर्षाया रे!कुई कमलिनी का करगहने आया रे!...*अंभज शीतल उत्पल देख रहा सपनेबिसिनी उत्पलिनी अरविन्दिनी सँग हँसनेकुंद कुमुद क्षीरज अंभज नीरज के सँग-नीलाम्बुज नीलोत्पल नीलोफर के रंग.कँवल जलज अंबोज नलिन पुहु...
sanjiv verma salil
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* ब्रम्ह कमल* कमल, कुमुद, व कमलिनी का प्रयोग कहीं-कहीं भिन्न पुष्प प्रजातियों के रूप में है, कहीं-कहीं एक ही प्रजाति के पुष्प के पर्याय के रूप में. कमल के रक्तकमल, नीलकमल तथा श्वेतकमल तीन प्रकार रंग के आधार पर वर्णित हैं. कमल-कमलिनी का विभाजन बड़े-छोटे आकार के आधार...
 पोस्ट लेवल : brahma kamal ब्रम्ह कमल
अनंत विजय
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पिछले दिनों एक साहित्यिक जमावड़े में आज के लेखकों के आचार-व्यवहार पर चर्चा हो रही थी। बहस इस बात पर हो रही थी कि साहित्य में निंदा-रस का कितना स्थान होना चाहिए। साहित्यकारों के बीच होनेवाले गॉसिप से लेकर एक दूसरे को नीचा दिखाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी चर्चा होने ल...
jaikrishnarai tushar
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एक लोकभाषा गीत-मोदी जी कै काम जैसे रात में अँजोरियामोदी जी कै काम जइसे रात में अँजोरिया ।फूलवा कमल कै महकै मह मह साँवरिया ।सड़कन क जाल बिछलस्वच्छता देखात बागैस के कनेक्शन सेहियरा जुड़ात बाघर-घर में शौचालयबड़ी नीक बात बाखतम बा दलालीबन्द होई चोर बजरिया ।ज्ञान औ विज्ञान...
Bharat Tiwari
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अरुंधति रॉय इन हिंदी — स्वतंत्र किन्तु जाति व्यवस्था में आकंठ डूबा भारत राष्ट्र — एक था डॉक्टर एक था संतकि क्याक्या गाँधी नही थे और क्याक्या आंबेडकर थेअरुंधति राय की किताब उनकी भाषा सब उनके निर्भीक तेवर के होते हैं। कुछ समय पहले अंग्रेजी में प्रकाशित उनकी किताब 'द...
Tejas Poonia
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इन्टरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल ऑफ़ श्री गंगानगर में एक से एक बेहतरीन फ़िल्में दिखाई गई। लेकिन उनमें से जो दिल को छू गई उन फिल्मों पर एक-एक करके आगे लिखूंगा। सबसे पहले फिल्म ‘किताब’। करीब 24-25 मिनट की एक ऐसी शॉर्ट फिल्म है जिसमें मात्र एक कविता है और बाकि बैकग्राउंड...
अनंत विजय
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बौद्धिकता की बुनियाद ईमानदारी होती है। बुद्धिजीवियों से ये अपेक्षा की जाती है कि वो सार्वजनिक रूप से सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस रखते हैं। लेकिन हमारे देश में बहुधा बौद्धिक जगत में इस तरह की ईमानदारी दिखाई नहीं देती है। खासकर साहित्य,कला और संस्कृति के क्...
कुमार मुकुल
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यहां अरूण कमल रहते हैं मेरे प्रिय कवि।खगेन्‍द्र ठाकुर हैं यहां ख्‍यात नाम सरल। नंद किशोर नवल हैंनामवर आलोचक। इस शहर में इतिहासकार रामशरण शर्मारहते हैं। स्त्रियों के संघर्ष की झंडाबरदार शांति ओझा रहती हैं।अवधेश प्रीत हैं यहां कथाकार यारबाश आदमी। एक लगभगअपनी उम्र के...
अनंत विजय
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पिछले दिनों एक छोटे से साहित्यिक जमावड़े में बात ‘नई वाली हिंदी’ से शुरू हुई, जिसमें उन कृतियों पर लंबी बात हुई, फिर अन्य प्रकाशनों से प्रकाशित होनेवाले छोटे-छोटे उपन्यासों पर चर्चा चल निकली। वहां से होते होते साहित्य के तथाकथित मुख्यधारा के लेखन पर बात होने लगी। स...