ब्लॉगसेतु

शरद  कोकास
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कमलेश्वर ने कहा थासाहित्य में तरह तरह के अंतर्विरोधों ने बड़ी दिक्कतें पैदा कीं । इस अंतरविरोध के कारण यह दिखाई पडता था कि साहित्य में आदमी यह सोचता है ,घर के मामले में ,परिवार के मामले में यह सोचता है ,समाज के मामले में यह सोचता है और राजनीति के मामले में यह सोचता...
विनय प्रजापति
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शायिर: कमल किशोर 'भावुक'जो मरुस्थल की प्यास बुझा दे उस सावन की आयु बड़ी हैजो स्वर्णिम इतिहास रचा दे उस जीवन की आयु बड़ी हैकल्मषता सर धुन पछताए भाव भरा बस रहे समर्पणजो ऐसी निष्ठा उपजा दे उस पूजन की आयु बड़ी हैतन विषधर का बंदी हो पर मन की गंध रश्मियों से जोवन का वाता...