ब्लॉगसेतु

मधुलिका पटेल
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यह जीवन जब भीड़ में गुम हो जाने के बाद धीरे - धीरे तन्हा होता है धीरे - धीरे पंखुड़ियों से सूख कर बिखर जाते हैं यह रिश्ते प्यार स्नेह और अपनेपन की टूट जाती है माला धीरे - धीरे हर मन का गिरता जाता है धीरे - धीरे कम हो जाता...
Sanjay  Grover
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सभी नालायक एक-दूसरे को बहुत लाइक/पसंद करते हैं।एक जैसे जो होते हैं।वैसे वे किसी काम के हो न हों पर एक-दूसरे के बहुत काम आते हैं।मिलजुलकर भी अकेले सच से वे डरते हैं।अंततः एक दिन वे ख़ुदको श्रेष्ठ और अकेले सचको नालायक घोषित कर देते हैं।मज़े की बात यह है कि उसके बाद भी...
Sanjay  Grover
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ग़ज़ल                                                                           &n...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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कुछ तो दुःखसमुद्र के भी होंगेजो बार बार उफनता हैपानी छलकाता हैंदुःख में मैंने कुछआसूं छलका दिएतो क्यों इतनाबतंगड़ बनाते होसमुद्र शक्तिशाली हैउसे कुछ नहीं कहते होमुझे कमज़ोर समझदबाते होक्यों भूल जाते होबड़ा हो या छोटादुःख तो दुःख होते हैंसब को कष्ट देते हैंफिर क्यों अ...