ब्लॉगसेतु

अरुण कुमार निगम
209
*दोहा छन्द*`निर्णय के परिणाम से, हर कोई है स्तब्धसहनशीलता सर्वदा, जनता का प्रारब्ध ।जनता ने पी ही लिया, फिर से कड़ुवा घूँटकिस करवट है बैठता, देखें अब के ऊँट ।दूषित नीयत से अरुण, पनपा भ्रष्टाचारआशान्वित होकर सदा, जनता बनी कतार ।आकर कर दो राम जी, दुराचार को नष्टराम रा...
Yashoda Agrawal
5
कफ़नबर्फ़ के पैसे बचाबेटा ले तो आया हैकिंतु कब तकये धूपबत्ती संभाल पाएगी दुर्गंधविधवा के मन मेंचल रहा है ये द्वंदसोच रहा है बेटा उधरपिता के मृत शरीर पर यदि फटी धोतीडाली जा सकतीतो ख़रीद लाता वह माँ के लिए एक धोती सस्ती।करवटलंबी काली कार पर सजा दिए गये है...
मधुलिका पटेल
550
सोच रहा हूँ आज अपने गाँव लौट लेगांवों में अब भी कागा मुंडेर पर नज़र आते हैंउनके कांव - कांव से पहुने घर आते हैं पाँए लागू के शब्दों से होता है अभिनंदनआते ही मिल जाता है कुएँ का ठंडा पानी और गुड़ धानीनहीं कोइ सवाल क्यों आए कब जाना है नदी किनारे गले मे...