ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
Pratibha Kushwaha
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रविंदर रेड्डी की कलाकृति माइग्रेंटऐतिहासिक इमारतें या किले अपने आप में कई कलाओं केंद्र होते हैं। ऐसी जगहों पर मशहूर कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित की जाए, तो ऐसे में यह कठिन हो जाता है कि ऐसी जगहों को क्या नाम दिया जाए? ऐसी जगहें कलाओं का समुच्चय हो जाती है।...
अरुण कुमार निगम
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*हिन्दी फिल्मों के गायक कलाकार*गायक कलाकार फिल्मों के, रहते हैं पर्दे से दूरकिन्तु नायिका नायक को वे, कर देते काफी मशहूर।।सहगल पंकज मलिक जोहरा, राजकुमारी और खुर्शीदतीस और चालीस दशक की जनता इसकी हुई मुरीद।।रफी मुकेश किशोर सचिन दा, मन्नाडे हेमंत सुबीरकभी शरारत कभी नि...
shivraj gujar
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निवासदिल्लीपहली राजस्थानी फिल्ममाटी का लाल मीणा-गुर्जरअब तक    दो राजस्थानी फिल्मों माटी का लाल मीणा-गुर्जर व भंवरी में अभिनय। दोनों फिल्में रिलीज।    कैरियर की शुरुआत हिंदी फिल्म मिस्टर मजनू से।  भौजपुरी फिल्मों में भी सक्रिय। हा...
 पोस्ट लेवल : कलाकार अभिनेत्री
kumarendra singh sengar
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वीर बाँकुरों के बुन्देलखण्ड की पावन धरा ओरछा में पाँच दिवसीय भारतीय फिल्म समारोह 2018 ने सभी को अपनी-अपनी तरह से सम्मोहित किया है. पाँच दिनों के इस सांस्कृतिक समागम में कला थी, कलाकार थे, निर्देशन था, निर्देशक थे, रंगमंच था, फीचर फ़िल्में थीं, डाक्यूमेंट्री थी, शॉर्...
kumarendra singh sengar
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बुन्देलखण्ड सदैव से अनेकानेक रत्नों से सुशोभित रहा है. शौर्य, सम्मान, कला, संस्कृति, साहित्य, सामाजिकता आदि में यहाँ विलक्षणता देखने को मिलती आई है. यहाँ के निवासी अपने-अपने स्तर पर बुन्देलखण्ड की संस्कृति को उत्कर्ष पर ले जाने का कार्य करते रहते हैं. इसी कड़ी में ब...
डा. सुशील कुमार जोशी
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किस लिये चौंकना मक्खियों के मधुमक्खी हो जाने में सीखना जरूरी है बहुत कलाकारी कलाकारों से उन्हीं के पैमानों में किताबें ही किसलिये दिखें हाथ में पढ़ने वालों के जरूरी नहीं है नशा बिकना बस केवल मयखाने में शहर में हो रही गुफ्तगू पर कान देने से क्या फायदा बैठ क...
डा. सुशील कुमार जोशी
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किसी की मजबूरी होती है अन्दर की बात लाकर बाहर के अंधों को दिखाना बहरों को सुनाना और बेजुबानों को बात को बार बार कई बार बोलने बतियाने के लिये उकसाना सबके बस में भी नहीं होती है झोले में कौए रख कर रोज की कबूतर बाजी हर कोई नहीं कर सकता है भागते हुऐ शब्दों को लंगोट पहन...
Ram Shiv Murti Yadav
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राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित एवं नन्ही ब्लॉगर अक्षिता यादव (पाखी) की प्रतिष्ठित अंग्रेजी अख़बार दि टाइम्स ऑफ़ इण्डिया (जयपुर, राजस्थान) के किड्स जोन में प्रकाशित एक 'रेनबो' पेंटिंग। पाखी को बहुत-बहुत बधाई और स्नेहाशीष !!