ब्लॉगसेतु

अनंत विजय
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दिल्ली में 1964 के आसपास रशियन सेंटर ऑफ साइंस एंड कल्चर, जिसको साहित्यकार बोलचाल में रशियन कल्चर सेंटर कहा करते थे, एक बड़े साहित्यिक और सांस्कृतिक केंद्र के तौर पर उभरा था। ये जगह सेंट्रल दिल्ली के फिरोजशाह रोड पर था, अब भी है। रूस अपने साहित्य और संस्कृति को भारत...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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विकास में पिछड़े तो आत्महीनताघर कर गयी विमर्श में पतन हुआ तो बदलाभाव और हिंसा मन में समा गयी  भूमंडलीकरण के मुक्त बाज़ार ने इच्छाओं के काले घने बादल अवसरवादिता की कठोर ज़मीन तैयार की सामाजिक मूल्यों कीनाज़ुक ज...
S.M. MAsoom
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बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाये | एस एम् मासूम वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन पूरे भारत में देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनते हैं। जगह-जगह देवी सरस्वती की पूजा के लिए पंडाल लगाए जाते...
S.M. MAsoom
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फूलों की खेती से जिले के किसान मालामाल हो रहे हैं। वह दौर अब बीते दिनों की बात हो चुकी है, जब किसान सिर्फ परंपरागत खेती तक सीमित थे। गेंदे, गुलाब व ग्लेडियोलस की खेती किसानों को खूब मुनाफा दे रही है। इसमें ग्लेडियोलस का नंबर अव्वल है। शायद यह बहुत कम लोग जानते...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) हिंदू की पत्रकार पूर्णिमा जोशी जी ने बड़ी बेबाकी व निष्पक्षता से बताया कि, आज जो ढोंग - पाखंड बढ़ा है उसको बढ़ाने में मीडिया खास तौर पर इलेक्ट्रानिक...
Ramesh pandey
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नई दिल्ली में आर्ट आॅफ लिविंग के वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत के पास दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है और पूरे विश्व को मानवीय मूल्यों के जरिए जोड़ा जा सकता है। पीएम ने कहा कि भारत के लोगों को अपनी सा...
S.M. MAsoom
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जौनपुर अज़ादारी का अपना एक इतिहास है और शिया  मुसलमानों की आबादी लखनऊ के बाद यहाँ सबसे अधिक है | यहाँ एक से एक बड़े ऐतिहासिक इमामबाड़े और मस्जिदें मुग़ल और शार्की समय के मौजूद हैं इसीलिये यहाँ का मुहर्रम और चेहल्लुम दुनिया भर में मशहूर है | जौनपुर की अज़ादारी को अब...
Shachinder Arya
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कभी लगता है, एक दिन ऐसा भी होगा जब यहाँ लिखा हुआ एक-एक शब्द कभी किसी के समझ में नहीं आएगा। जैसे मुझे अभी से नहीं आ रहा। यहाँ की लगती गयी तस्वीरें इन सालों में जितनी ठोस, मूर्त, स्पष्ट हुई हैं, उसी अनुपात में सत्य उतना ही धुँधला, अधूरा, खुरदरा होकर मेरे भीतर घूम रहा...
Shachinder Arya
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तीसरी मंज़िल। सबसे ऊपर। इसके ऊपर आसमान। आसमान में तारे। अँधेरे का इंतज़ार करते। इंतज़ार चीलों के नीचे आने तक। वह वहाँ तब नहीं देख पाती, चमगादड़ों की तरह। इन्हे आँख नहीं होती देखने के लिए। वह तब भी नहीं छू जाते कभी किसी पत्ते को भी। हरे-हरे पत्ते। तुम्हारे गाल की तरह म...
Shachinder Arya
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हम ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहाँ हम ख़ुद नहीं जानते कि यह दौर हमारे साथ क्या कर रहा है। यह पंक्ति, अपने पाठक से बहुत संवेदना और सहनशीलता की माँग करती है कि वह आगे आने वाली बातों को भी उतनी गंभीरता से अपने अंदर सहेजता जाये। जब हम, किसी दिन अपनी ज़िन्दगी, इसी शहर में बि...