ब्लॉगसेतु

रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कविता
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कविता
Rajeev Upadhyay
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क्योंकिमैं रुक ना सकीमृत्यु के लिएदयालुता से मगरइन्तजार उसने मेरा कियाऔर रूकी जब तो हम और अमरत्वबस रह गए।धीरे-धीरे बढ़ चले सफर पर हम जल्दबाजी नहीं उसे। सब कुछ छोड़ दिया मैंने अपनी मेहनत और आराम भी। शिष्टता उसकी ऐसी थी!हम स्कूल से होकर गु...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कविता
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कविता
नई कलम
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जीवन का सत्य मरण में है बाक़ी सब कुछ विचरण में है ,जो उदय हुआ वो अस्त भी हैपागल मानव तो व्यस्त ही है एक हवा भी आएगी इक दिनले जायेगी साँसे भी इक दिनये भवन छोड़कर चल दोगेहोगा भू कम्पन भी इक दिनये स्वार्थ स्वार्थ का खेल सनमये व्यर्थ व्यर्थ का प्रेम सनम...
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ANITA LAGURI (ANU)
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  चित्र गूगल से साभारमरुस्थल चीत्कार उठाप्रसव वेदना से कराह उठा धूल-धूसरित रेतीली मरूभूमि मेंनागफनी का पौधाढीठ बन उग उठाथा उसका सफ़र बड़ा कठिनबादलों ने रहम न दिखाया न उसे कोई उर्वरक मिला ज़मीं से नमी का सहारा न मिला फिर भी ढी...
Lokendra Singh
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हार और जीत ही काफी नहीं जिंदगी में मेरे लिएमीलों दूर जाना है अभी मुझे। निराशा के साथ बंधी आशा की इक डोर थामेउन्नत शिखर की चोटी पर चढ़ जाना है मुझे। हार और जीत ही....है अंधेरा घना लेकिनइक दिया तो जलता है रोशनी के लिएउसी रोशनी का सहारा लिए भे...
Rajeev Upadhyay
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उलझनें हर बार छटपटाहट में बदल जाती हैं और मन जैसे किसी कालकोठरी में हो बंद मुक्त होने का स्वप्न लेकर देता है दस्तक तेरे महल के दरवाजे पर लिखा है जहाँ शब्दों में बडे ‘कि अंदर आना मना है।'प्रतिबंध ही तो आसमान के दरवाजे को ढकेलकर उस पार क...
नई कलम
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चूहे की घड़ी ==========टिक टिक टिक कौन चूहा बैठा है मौन बिल्ली से नाराज़ है शैतानी से बाज़ है खाना भी ना खाया है मनाए उसे कौन...घड़ी चुरायी बिल्ली ने खरीदी थी जो दिल्ली में बिल्ली से ये डरता है गली में बनता डॉन...टिक...