ब्लॉगसेतु

Meena Bhardwaj
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                       नवनिर्माण की नींवऔर ऊसर सी जमीन परपूरी आब से इतरा रहे होकिसके प्रेम में हो गुलमोहरबड़े खिलखिला रहे होबिछड़े संगी साथीमन में खलिश तो रही होगीटूटी भावनाओं की किर्चेंतुम्हें चुभी जरूर हों...
 पोस्ट लेवल : कविताएँ
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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सिंधु तट पर एक सिंदूरी शाम गुज़र रही थीथी बड़ी सुहावनी  लगता था भानु डूब जाएगा अकूत जलराशि में चलते-चलते बालू पर पसरने का मन हुआ भुरभुरी बालू पर दाहिने हाथ की तर्जनी से एक नाम लिखा सिंधु की दहाडतीं...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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पृथ्वी की उथल-पुथल उलट-पलटकंपन-अँगड़ाई  परिवर्तन की चेष्टा कुछ बिखेरा कुछ समेटाभूकंप ज्वालामुखी बाढ़ वज्रपात सब झेलती है सहनशीलता से धधकती धरतीजीवन मूल्यों की फफकती फ़सल देख रहा है आकाश मरती &n...
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--नहीं जानता कैसे बन जाते हैं,मुझसे गीत-गजल।जाने कब मन के नभ पर,छा जाते हैं गहरे बादल।।--ना कोई कॉपी ना कागज,ना ही कलम चलाता हूँ।खोल पेज-मेकर को,हिन्दी टंकण करता जाता हूँ।।--देख छटा बारिश की,अंगुलियाँ चलने लगतीं है।कम्प्यूटर देखा तो उस पर,शब्द उगलने लगतीं हैं।।--नज...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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जेलों में  जिस्म तो क़ैद रहे  मगर जज़्बात  आज़ाद रहे महामूर्खों के  दिमाग़ की उपज  बेवक़ूफ़ कीड़े-मकौड़े  खाए जा रहे काँटों के बीच मनोमालिन्य से परे आशावान अंतरात्मा के पलते मीठे बेर   चीख़-चीख़करअपने पकने की म...
देवेन्द्र पाण्डेय
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मैने मांगा, जाड़े की धूपउसने दिया,घना कोहरा!मैने पूछा,"ठंडी कब जाएगी?"उसने कहा,"थोड़ी बर्फवारी होने दो।"मैने पूछा,"बसंत कहाँ है?"उसने कहा,"रुको! एक ग्लेशियर टूट जाने दो!"मैने कहा,"जाओ! तुमसे बात नहीं करते।"उसने कहा,"मित्र! तुमसे ही सीखी है यह शत्र...
देवेन्द्र पाण्डेय
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क्या तुम्हें याद है?पहली बारगुलाब पकड़ते वक्तपरस्परछू गई थींहमारी उँगलियाँतब क्या हुआ था?मुझे तो याद है..गुलाब और गुलाबी हो गया था!क्या तुम्हें याद है?तुम्हारी जुदाई में कैसे रंग बदलता था गुलाब?मुझे तो याद हैबिलकुल पीला!और फिरमेरे लौट जाने की बात सुनते हीसफेद!क...
 पोस्ट लेवल : गुलाब कविता रोज डे
kumarendra singh sengar
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तुम्हारे साथ जो गुजरी वो छोटी जिंदगानी है, वही बाकी निशानी है वही बाकी कहानी है। तुम्हारे दूर जाने से न जीवन सा लगे जीवन,रुकी-रुकी सी है धड़कन न साँसों में रवानी है।तुम्हारी याद के साए में अब जीवन गुजरना है,लबों पर दास्तां तेरी इन आँखों को बरसना है।नहीं त...
 पोस्ट लेवल : यादें कविता भाई मिंटू
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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 जीवन के रीते तिरेपन बसंतमेरे बीते तिरेपन बसंत  बसंत की प्रतीक्षा का हो न कभी अंतप्रकृति की सुकुमारता का क्रम-अनुक्रम  चलता रहे अनवरत अनंत नई पीढ़ी से पूछो-कब आया बसंत? कब गया बसंत...? &...
गौतम  राजरिशी
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यह ग़ुस्सा कैसा ग़ुस्सा हैयह ग़ुस्सा कैसा कैसा हैयह ग़ुस्सा मेरा तुझ पर हैयह ग़ुस्सा तेरा मुझ पर हैये जो तेरा-मेरा ग़ुस्सा हैयह ग़ुस्सा इसका उसका हैयह ग़ुस्सा किस पर किसका हैयह ग़ुस्सा सब पर सबका हैयह ग़ुस्सा ये जो ग़ुस्सा हैयह यूं ही नहीं तो उतरा हैजब पाॅंव-पाॅंव...
 पोस्ट लेवल : कविता गीत