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sanjiv verma salil
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बाल कविता: कोयल-बुलबुल की बातचीत -संजीव 'सलिल'*कुहुक-कुहुक कोयल कहे: 'बोलो मीठे बोल'.चहक-चहक बुलबुल कहे: 'बोल न, पहले तोल'..यह बोली: 'प्रिय सत्य कह, कड़वी बात न बोल'.वह बोली: 'जो बोलना उसमें मिसरी घोल'.इसका मत: 'रख बात में कभी न अपनी झोल'.उसका मत: 'निज गुणों का कभ...
 पोस्ट लेवल : कोयल बुलबुल बाल कविता
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मैं अपनी मम्मी-पापा के,नयनों का हूँ नन्हा-तारा। मुझको लाकर देते हैं वो,रंग-बिरंगा सा गुब्बारा।।--मुझे कार में बैठाकर,वो रोज घुमाने जाते हैं।पापा जी मेरी खातिर,कुछ नये खिलौने लाते हैं।। --मैं जब चलता ठुमक-ठुमक,वो फूले नही समाते हैं।जग के स्वप्न सलोने,उनकी...
Yashoda Agrawal
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 #दाग अच्छे हैदाग पर ना जादाग है तभी हम सच्चे है दाग बहुत अच्छे हैसफ़ेद कुर्ती पर लगा दागक्यों आंखों को नहीं भाताइस दाग से ही तोरचता संसार साराक्यों शराब खुले मेंपैड काली पन्नी में लाए जातेउन पांच दिनों की कीमतक्यों लोग समझ ना पातेरचा ब्रह्मांड उन दा...
देवेन्द्र पाण्डेय
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धीरे-धीरेकम हो रहा थानदी का पानीनदी मेंडूब कर गोता लगाने वाले हों या एक अंजुरी पानी निकाल करतृप्त हो जाने वाले,सभी परेशान थे..बहुत कम हो चुका हैनदी का पानी!बात राजा तक गईजाँच बैठीनदी से ही पूछा गया...पानी क्यों कम हुआ?नदी ने राजा को देखा कुछ बोलने के...
 पोस्ट लेवल : कविता व्यंग्य
Kavita Rawat
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शत्रु की मुस्कुराहट से मित्र की तनी हुई भौंहे अच्छी होती हैमूर्ख के साथ लड़ाई करने से उसकी चापलूसी भली होती हैकिसी कानून से अधिक उसके उल्लंघनकर्ता मिलते हैंऊँचे पेड़ छायादार अधिक लेकिन फलदार कम रहते हैंपत्थर खुद भोथरा हो फिर भी छुरी को तेज करता हैमरियल घोड़ा भी हट्टे-...
Lokendra Singh
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उदासी और निराशा से मुक्त करती कविताहालांकि परिस्थितियां नहीं हैं मुस्कुराने की।तुमने कहा मुस्कुराने को, सो मैं हँस दिया।।मेरे दर्द को समझने की कोशिश में नहीं जोउसके सामने रोना क्या, सो मैं हँस दिया।।बिछड़ने का रत्ती भर गम नहीं था उसकोउदास हो विदा देता कैसे, सो मैं ह...
Yashoda Agrawal
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ये जो विस्तृत नीलाआसमान देख रहे हो न?ये मेरा है,इसलिए नहीं किमैंने इसे जीता है,इसलिए कि मैंउड़ने का माद्दा रखती हूँ,यही बात तुम्हेंहमेशा से चुभती रही है,जिसकी खुन्नस निकालने के लिएतुम मेरी उड़ान रोकने की कोशिशें करते रहते हो,नाकाम कोशिशें,कभी मेरे&nb...
गौतम  राजरिशी
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"प्रतीक्षा के बाद बची हुई असीमित संभावना"...यही! बिलकुल यही सात शब्द, बस! अगर शब्दों का अकाल पड़ा हो मेरे पास और बस एक पंक्ति में "मैंने अपनी माँ को जन्म दिया है" के पन्नों में संकलित कविताओं को समेटना हो तो बस ये सात शब्द लिख कर चुप हो जाना चाहूँगा कि रश्मि भारद्वा...
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--गोरा-चिट्टा कितना अच्छा।लेकिन हूँ सूअर का बच्चा।।--लोग स्वयं को साफ समझते।लेकिन मुझको गन्दा कहते।।--मेरी बात सुनो इन्सानों।मत अपने को पावन मानों।।--भरी हुई सबके कोटर में। तीन किलो गन्दगी उदर में।।--श्रेष्ठ योनि के हे नादानों।सुनलो धरती के...
usha kiran
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 पार्क, स्टेशन, सड़क हो या बाजारये जो तुम हर जगह मुझसे बीस कदम आगे चलते हो ननाक की सीध में एकदमसीना तान करसतर कन्धेहथेली पर सूरज उगाएऔर सोचते हो कि आगे हो मुझसे...?गलत सोचते हो तुमबिल्कुल गलतमैं और बीस कदम अपनी मर्जी से पीछे होकरकहीं छिप जा...
 पोस्ट लेवल : कविता