ब्लॉगसेतु

Meena Bhardwaj
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वक्त की शाख परढेरों लम्हें उगे थेझड़बेरियों मे लदे बेरों सरीखेकुछ-कुछ खट्टेकुछ -कुछ मीठेलम्हा-लम्हा चुन लिया चिड़िया के चुग्गे साभर लिया दामन मेंऔर बस..बन  गईअनुभूत पलों में पगी खट्टी- मीठी जिन्दगी★★★
 पोस्ट लेवल : कविताएँ
Meena Bhardwaj
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अक्सर खामोश लम्हों मेंकिताबें भंग करती हैंमेरे मन की चुप्पी…खिड़की से आती हवा के साथपन्नों की सरसराहटबनती है अभिन्न संगी…पन्नों से झांकते शब्दसुलझाते हैं मन की गुत्थियांशब्द शब्द झरता है पन्नों सेहरसिंगार के फूल सा…नीलगगन में चाँदबादलों की ओट से झांकताधूसर सा लगता ह...
 पोस्ट लेवल : कविताएँ
Meena Bhardwaj
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सांझ की चौखट परआ बैठी दोपहरीकब दिन गुजराकुछ भान  नही...नीड़ों में लौट पखेरुडैनों में भरउर्जित जीवनउपक्रम करते सोने कावे कब सोये फिर कब जागेपौ फटने तकअनुमान नही...गुजरा हर दिनएक युग जैसाकितने युग गुजरेबस यूंहींअवचेतन मन कोज्ञान नही...★★★★★
 पोस्ट लेवल : कविताएँ
Meena Bhardwaj
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"शरद पूर्णिमा का चाँद"चाँदी जैसी आब लिएधवल ज्योत्सना कीऊँगली थाम...बादलों पर कर सवारीनीलाम्बर आंगन मेंउतरा है अपनी पूरी ठसक भरीसज-धज के साथशरद पूर्णिमा का चाँदरात की सियाही मेंकहीं भी..धरती पर उगेअनगिनत दिपदिपातेअपने सरीखे दिखतेभाई-बंधुओं के बीचठगा सा सोचता है...
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Meena Bhardwaj
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 तिनका तिनका जोड़ तरु शाखाओं के बीचबड़े जतन से उन्होंनेबनाया अपना घरसांझ ढलते ही पखेरूअपना घर ढूंढ़ते हैं यान्त्रिक मशीन नेकर दी उनकी बस्ती नष्टटूटे पेड़ों को देख करविहग दुखित हो सोचते हैंउनके घर की नींव परबहुमंजिला भवन बनेंगेहर शाख घरों से पटी होगीकंक्र...
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अभिलाषा चौहान
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Meena Bhardwaj
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खामोशी का मतलबबेज़ारी नही होताऔर मूर्खता तो कभी नहीकुदरत ने  हमें बख़्शी हैबोलने के लिए एक जुबानऔर सुनने को  दो कानसुनना और सुन कर गुननाअहम् अंश हैं जीवन केनीरवता में फूटता संगीतदेता सीख व्यवहार कीऔर फूंकता है प्राणसुप्तप्राय: नीरस मन मेंएकांत की शांति में&...
 पोस्ट लेवल : कविताएँ
Meena Bhardwaj
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जिन्दगी की पहेलीरेशमी लच्छियों सीउलझी-उलझी मगरअहसासों में मखमलीपहेली तो पहेलीजितना प्रयास करोसमझने और सुलझाने काउलझती ही चली जाती हैउसके बाद इन्सान न तोगौतम बुद्ध बन पाता हैऔर न आम इन्सान ही रह पाता हैगौतम बुद्ध….वो तो सिद्धार्थ थेराजा शुद्धोधन के पुत्ररोज की रोटी...
 पोस्ट लेवल : कविताएँ
Meena Bhardwaj
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 मीठे अहसासऊषा किरण खिलती कलियाँवर्षा की बूंदेंउगता सा जीवनअभिनन्दन करनासीखो ना ....कभी खट्टा साकभी मीठा साकड़वेपन काअहसास लिएअनुभूत क्षणों का              &nb...
 पोस्ट लेवल : कविताएँ
Meena Bhardwaj
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पहाड़ों की एक सांझगीले गीले से बादलमोती सी झरती बूँदेंखाली बोझिल सा मनऐसे में चाय की प्यालीमन को स्पन्दित करतीप्राणों में उर्जा भरतीचिन्तन को प्रेरित करतीपंचभूत की है प्रधानताजड़ चेतन मे सारेयूं ही भागे फिरते हैं हममोह-माया के मारे&nbs...
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