ब्लॉगसेतु

शेखर सुमन
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उन तंग गलियों में हाथों में हाथ डाले जनमती पनपती मोहब्बत देखी है कभी... उन आवारा सड़कों पर छोटी ऊँगली पकडे चलती ये मोहब्बत... उस समाज में जहां सपनों का कोई मोल नहीं, ऐसे में एक दूसरे की आखों में अपना ख्व़ाब सजाती ये मोहब्बत... नाज़ु...
शेखर सुमन
270
बहुत धीमी बहती है मोहब्बत लोगों की रगों में,नफरत से कहीं धीमी...नफरत इतनी किसड़क पर अपनी गाड़ी कीहलकी सी खरोंच पर भीहो जाएँ मरने-मारने पर अमादा,और मोहब्बत इतनी भी नहीं किअपने माँ-बाप को लगा सकेंअपने सीने सेऔर कह सकें शुक्रिया...बहुत धीमी बहती है मोहब्बत लोगों की रगों...
अन्तर सोहिल
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इस पत्थर पर बहुत आये बैठेऔर चले गएकिसने सुबह मुड़कर देखाकिसने सोचापत्थर भी पिघलसकता हैपत्थर बेशक पत्थर हैपर पिघलता है अंदर ही अंदरदिखाई नहीं देता सबकोमहसूस कर सकते हैंवही जिसने इसेबाहर से नहींअंतर से छुआइन्तजार कर रहा हैपत्थर भीफिर से पत्थर होकरपिघलने...
Abhishek Kumar
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आज बेहद ख़ास दिन है मेरे लिए. आज जन्मदिन है मेरी दीदी, प्रियंका गुप्ता का. इस ब्लॉग से वो मेरे से ज्यादा जुड़ी हुई हैं. वो नहीं होती तो शायद ये ब्लॉग बहुत पहले बंद हो चुका होता. आज उनके जन्मदिन पर उन्हीं की तीन अप्रकाशित कवितायेँ यहाँ साझा कर रहा हूँ.. 1. &...
 पोस्ट लेवल : Poems Priyanka Gupta कवितायें
अंजू शर्मा
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  बेपता घर में  एक-दूसरे के बिना न रह पानेऔर ताज़िन्दगी न भूलने का खेलखेलते रहे हम आज तकहालाँकि कर सकते थे नाटक भीजो हमसे नहीं हुआकिंतु समय की उसी नोक परकैसे सम्भव हमेशा साथ रहना दो काचाहे वे कितने ही एक क्यों न होंतो बेहतर होगा हम घर बना लेंजगह...
Shikha Varshney
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मैंने अपनी नींदें बेच, कुछ ख्वाब खरीदे थे। रख दिया था सहेज कर, उन्हें अपनी पलकों तले। वक़्त की बारिशों औ आंधी से, कुछ उड़ गए, कुछ बह गए।   कुछ  को बचाया जतन से, मन की नमी से भीगे से थे।   सुखाया फिर मैंने उन्हें, अपने एहसासों...
 पोस्ट लेवल : कवितायें
अन्तर सोहिल
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ब्लॉगर्स से फेसबुकिया बनने पर कौन-कौन क्या-क्या बन गया। तांगे में या रेस के घोडे को एक ऐनक/Blinker पहनाई जाती है....ताकि वो केवल सामने ही देख सके। ऐसे ही सभी ने ब्लिंकर्स पहने हैं और केवल नाक की सीध में ही देखते हुये लिखे जा रहे हैं। ब्लॉग्स पर रिसर्च और मेहनत...
Shikha Varshney
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अब नहीं होती उसकी आँखे नम जब मिलते हैं अपनेअब नहीं भीगतीं उसकी पलके देखकर टूटते सपने।अब नहीं छूटती उसकी रुलाई किसी से उल्हानो सेअब नहीं मरती उसकी भूख किसी के भी तानो से।अब किसी की चढ़ी तौयोरियों से नहीं घुटता मन उसकाअब किसी की उपेक्षाओं से नहीं घुलता तन उसका । अब...
 पोस्ट लेवल : कवितायें
शेखर सुमन
270
मेरे उतारे हुए मोज़े सेआती हैपसीने की अजीब सी गंध,जैसे कुछ कहानियां और कुछ नज्मेंथक गयी हों मेरे साथ चलते हुएऔर बह गयी होंपैरों के रास्ते से...बीती रातएक चूहा चुरा ले गयाछत पे पसरे उन मोजों को,जाने उसे मेरी कौन सी कहानीपसंद आ गयी होगी,और उसे कुतर करबना लिया होगाअपन...
 पोस्ट लेवल : टूटी-फूटी कवितायें
Shikha Varshney
153
ऐ मुसाफिर सुनो,  वोल्गा* के देश जा रहे हो  मस्कवा* से भी मिलकर आना.  आहिस्ता रखना पाँव  बर्फ ओढ़ी होगी उसने  देखना कहीं ठोकर से न रुलाना।  और सुनो, लाल चौराहा* देख आना  पर जरा बचकर जाना  वहीँ पास की एक ईमारत में&nbs...
 पोस्ट लेवल : कवितायें