ब्लॉगसेतु

girish billore
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     भारतीय भाषाई साहित्य अंतरजाल पर जिस तरह विस्तार पा रहा है, उसकी कल्पना हमने हिंदी चिट्ठाकारी के प्रारंभिक दौर में कर ली थी। परंतु बहुत सारी लोगों को हमारा काम बेवकूफी से बढ़कर कुछ नहीं लग रहा था।    कुछ लोग हिंदी चिट्ठाकारी क...
Yashoda Agrawal
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सिर्फ़ तुम्हारी बदौलतभर गया था अप्रैलविराट उजाले सेहो रही थी बरसातअप्रैल की एक ख़ूबसूरत सुबह मेंचाँद के चेहरे पर नहीं थी थकावटरातों के सिलसिले मेंएक इन्द्रधनुष टँग गया थाअप्रैल की शाम मेंएक सूखे दरख़्त की फुनगी मेंमंदिर की घंटियाँगिरजे की कैंडल्स औरमस्जिद की अज़ानघ...
Yashoda Agrawal
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गीतों के मधुमय आलापयादों में जड़े रह गएबहुत दूर डूबी पदचापचौराहे पड़े रह गएदेखभाल लाल-हरी बत्तियाँतुमने सब रास्ते चुनेझरने को झरी बहुत पत्तियाँमौसम आरोप क्यों सुनेवृक्ष देख डाल का विलापलज्जा से गड़े रह गएतुमने दिनमानों के साथ-साथबदली हैं केवल तारीख़ेंपर बदली घड़ियो...
Yashoda Agrawal
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तोड़ो, तोड़ो, तोड़ो कारापत्थर, की निकलो फिर,गंगा-जल-धारा!गृह-गृह की पार्वती!पुनः सत्य-सुन्दर-शिव को सँवारतीउर-उर की बनो आरती!--भ्रान्तों की निश्चल ध्रुवतारा!--तोड़ो, तोड़ो, तोड़ो कारा!- पण्डित सूर्यकान्त त्रिपाठी "निराला"
Yashoda Agrawal
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उघड़ी चितवनखोल गई मनउजले हैं तनपर मैले मनउघड़ी चितवनखोल गई मनउजले हैं तनपर मैले मनउलझेंगे मनबिखरेंगे जनअंदर सीलनबाहर फिसलनहो परिवर्तनबदलें आसनबेशक बन—ठनजाने जन—जनभरता मेलाजेबें ठन—ठनजर्जर चोलीउधड़ी सावनटूटा छप्परसर पर सावनमन ख़ाली हैंलब ’जन—गण—मन’तन है दल—दलमन है द...
Yashoda Agrawal
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अभी न होगा मेरा अन्त अभी-अभी ही तो आया है मेरे वन में मृदुल वसन्त- अभी न होगा मेरा अन्त हरे-हरे ये पात, डालियाँ, कलियाँ कोमल गात! मैं ही अपना स्वप्न-मृदुल-कर फेरूँगा निद्रित कलियों पर जगा एक प्रत्यूष मनोहर पुष्प-पुष्प से...
Yashoda Agrawal
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जाने क्या होताइन प्यार भरी बातों में?रिश्ते बन जाते हैंचन्द मुलाकातों में ।मौसम कोई होहम अनायास गाते हैं,बंजारे होठ मधुरबाँसुरी बजाते हैं,मेंहदी के रंग उभर आते हैंहाथों में ।खुली-खुली आँखों मेंस्वप्न सगुन होते हैं,हम मन के क्षितिजों परइन्द्रधनुष बोते हैं,चन्द्रमा उ...
Yashoda Agrawal
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ये लफ़्ज़ आईने हैं मत इन्हें उछाल के चल,अदब की राह मिली है तो देखभाल के चल ।कहे जो तुझसे उसे सुन, अमल भी कर उस पर,ग़ज़ल की बात है उसको न ऐसे टाल के चल ।सभी के काम में आएँगे वक़्त पड़ने पर,तू अपने सारे तजुर्बे ग़ज़ल में ढाल के चल ।मिली है ज़िन्दगी तुझको इसी ही मकसद...
Yashoda Agrawal
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दुःख ...आतंक ...पीड़ा ...और सब तरफ़फैले हैं .............न जाने कितने अवसाद ,कितने तनाव ...जिनसे मुक्ति पानासहज नही हैंपर ,यूँ ही ऐसे मेंजब कोई...नन्हीं ज़िन्दगीखोलती है अपने आखेंलबों पर मीठी सी मुस्कान लिएतो लगता है किअभी भी एक है उम्मीदजो कहीं टूटी नहीं हैएक आशा...
Yashoda Agrawal
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वजह बिन फ़ासला रखते नहीं हैं किसी से दुश्मनी करते नहीं हैं भरेंगे जल्द ही सब घाव तन केजखम अब ये बहुत गहरे नहीं हैं समझ लेता सभी का दर्द है दिलये आँसू यूँ ही तो बहते नहीं हैं सहेजी अश्क़ की दौलत जिगर मेंजवाहर ये अभी बिखरे नहीं हैं दुआ में मा...