ब्लॉगसेतु

Padm Singh
365
हंसना मुस्काना खुश रहना झूठा लगता है जैसे कोई सपना थक कर टूटा लगता है महल चुने, दीवारें तानी चुन चुन जोड़ा दाना पानी लाखों रिश्तों में अपनी सूरत ही लगती है अनजानी कर्तव्यों की कारा में मन का पंछी बिन पंख हो गया अनजाने अनचाहे पथ पर चलते जाना भी बेमानी मन...
 पोस्ट लेवल : कविता
अजय  कुमार झा
179
बस्तियां खाली करवाने को ,वो अक्सर उनमें ,आग लगा देते हैं ॥उतनी तो दुश्मनी नहीं कि ,कत्ल कर दें मेरा , इसलिए ,रोज़ , ज़हर ,बस ,ज़रा ज़रा देते हैं ॥मैंने कब कहा कि , गुनाह को ,उकसाया उन्होंने , वे तो बस ,मेरे पापों को , थोडी सी,हवा देते हैं ॥वो जब करते हैं गुजारिश ,अ...
 पोस्ट लेवल : हिन्दी कविता
sangeeta swarup
201
कल अचानक हीइस नेट की दुनिया नेमेरे ज्ञान चक्षु खोल दिएऔर मुझे पहली बार हीपता चला कि --साल भर में एक दिनदोस्ती का भी होता हैशायद बाकी&nb...
shivraj gujar
551
1हां ! भईअब क्यों आएगा तूंगांव।कौन है अब तेरा यहां। तेरी लुगाई और तेरे बच्चेले गया तू शहरयह झिड़की सुननी पड़ती हैहर उस बेटे कोजो आ गया है शहररोजी-रोटी कमाने।आया था जब वो शहरअकेला थासो भाग जाता था गांवसप्ताह-महीन में।अब यह नहीं हो पाताइतनी जल्दीक्योंकि-अब बढ़ गई है...
Krishna Kumar Yadav
441
'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती ********************************************************************************कृष्ण कुमार यादव : एक परिचय- सम्प्रति भारत सरकार में निदेशक. प्रशासन के साथ-साथ साहित्य, लेखन और ब्लागिंग के क्षेत्र में भ...
Mithilesh Dhar Dubey
390
...आ चले कही दूर....इन सब रिश्तो से अलग.......एक नया रिश्ता बनाये...दूरियां गुम हो जाये...सारे बंधन तोड़ हम एक हो जाये.....आ सनम चल मेरे संग....इन सब मौसमो से अलग....एक नया मौसम लाये....मोहब्बत की बारिस में बस भीगते जाये....रास्तो पर संग फिसलते जाये....आ मेरे हमदम...
 पोस्ट लेवल : कविता
sangeeta swarup
201
मेरी ज़िंदगी में,अमावस क्यों हैस्याह रात की ये तन्हाईयां क्यों हैंचाँद भी आसमाँ परदिखता नही हैचाँदनी का भी कोईनामों निशाँ नही हैतारों की झिलमिलाहट हीसुखद लग रही हैजैसे कि ना जानेकितने स्वप्नआसमाँ पे टंग गये हैं यहाँ से खड़ी मैंदेखती हूँ जबजैसे कि सपने सब&...
kumarendra singh sengar
451
एक मौन,शाश्वत मौन, तोड़ने की कोशिश मेंऔर बिखर-बिखर जाता मौन।कितना आसान लगता हैकभी-कभीएक कदम उठानाऔर फिर उसे बापस रखना,और कभी-कभीकितना ही मुश्किल सा लगता हैएक कदम उठाना भी।डरना आपने आपसे औरचल देना डर को मिटाने,कहीं हो न जाये कुछ अलग,कहीं हो जाये न कुछ विलग।अपने को अ...
 पोस्ट लेवल : साहित्य कविता
kumarendra singh sengar
451
कविता - जीवन जीने को आया हूँ =================================(ये हैं हमारे स्टायलिश भांजे)=================================फिर जिन्दा होकर लौटा हूँ, मैं आज तुम्हारी नगरी में।जीवन जीने को आया हूँ, मैं आज तुम्हारी नगरी में।।अपनों को जाते देखा है,गैरों को आते देखा...
 पोस्ट लेवल : साहित्य कविता
kumarendra singh sengar
30
आज किसी विषय विशेष पर लिखने का मन नहीं किया। इस कारण सोचा कि अपनी एक कविता ही आपको पढवा दें। बताइयेगा कि कैसी लगी? साथ में दो फोटो अपनी तरह के..........(ये हैं हमारे स्टायलिश भांजे)=================================फिर जिन्दा होकर लौटा हूँ, मैं आज तुम्हारी नगरी में...
 पोस्ट लेवल : कविता