ब्लॉगसेतु

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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आज एक बार फिर हम बर्बर ख़ूनी खेल का शोक मना रहे हैं। ऐसे में मुझे छात्र जीवन में संग्रहित की गयी कविता बरबस याद आ गयी है। इसके रचयिता मोहन तिवारी के बारे में नाम के अतिरिक्त मेरे पास कोई सूचना नहीं है। सुधी पाठक या स्वयं रचनाकार यदि इसे देखकर कुछ प्रकाश डाल सकें तो...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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ब्लॉगवाणी में ‘ज्यादा पढ़े गये’ चिठ्ठों की सूची में कल ०९ मई,२००८ को शीर्ष पर क्लिक किया तो ‘कबाड़खाना’में पहुँच गये। वहाँ अशोक पांडे जी ने निकानोर पार्रा (जन्म: 5 सितम्बर1914) की एक पुरानी कविता पोस्ट कर रखी थी। मुमकिन नहीं अड़े रहना इस टेक पर कि सिर्फ एक ही रास्ता स...
 पोस्ट लेवल : मंथन जैसा देखा कविता
अनीता कुमार
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एह्सासमेरे एक नेट मित्र हैं देहली से राजेश जी, उनका लड़का विरल त्रिवेदी लगभग मेरे लड़के की ही उम्र का होगा। नयी पीढ़ी का नवयुवक जिसका आत्म चिंतन भी अंग्रेजी में होता है। किताबों से दूर, आत्मविश्वास और अपने अंदर के टेलेंट के बूते पर आगे बढ़ने का सलीका लिये एक आम बम्बईया...
 पोस्ट लेवल : कविता
सुनीता शानू
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एक छोटा सा शहर जबलपुर...क्या कहने!!!न न न लगता है हमे अपने शब्द वापिस लेने होंगे वरना छोटा कहे जाने पर जबलपुर वाले हमसे खफ़ा हो ही जायेंगे...:) तो दोस्तों एक खूबसूरत महानगर जबलपुर...गये तो थे हम हकीम साहेब से ससुर जी का इलाज़ करवानेमगर स्टेशन पर ही पकड़े गये कवि महोदय...
 पोस्ट लेवल : विशेष कविता
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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वन-डे ने जब टेस्ट को, टक्कर में दी मात।ट्वेन्टी-ट्वेन्टी ने किया, तब आकर उत्पात॥ तब आकर उत्पात मचा, डी.एल.एफ़ कप में।जुटे धुरंधर देश-देश के नाहक गप में॥धन-कुबेर इस मेले की रौनक बढ़वाते।फ़िल्मी तारे आकर टी. आर.पी. चढ़ाते॥चीयर-लीडर थक गये, नाच-नाच...
 पोस्ट लेवल : चकल्लस तुकांत कविता
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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आज बिस्तर पर पहली बारतकिये को खड़ा पाया ,तो घबरा गया, सोचा यह कैसा जमाना आ गया तकिये ने मेरी बात समझ लीऔर बोली -"आज तक तुने मुझे बहुत सताया है कभी पैरो से उछाला है,तो कभी सीने से लगाया है,पैरों के बीच फंसा तूने,मुझे अपनी वासना का शिकार भी बनाया है.अपने जीवन की अनगि...
सुनीता शानू
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धरती पर फ़ैली है,सरसों की धूप-सीधरती बन आई है, नवरंगी रूपसी ॥फ़ूट पड़े मिट्टी से सपनों के रंगनाच उठी सरसों भी गेहूं के संग।मक्की के आटे में गूंथा विश्वासवासंती रंगत से दमक उठे अंग।धरती के बेटों की आन-बान भूप-सीधरती बन आई है,नवरंगी रूपसी॥बाजरे की कलगी-सी, नाच उठी देहआँ...
 पोस्ट लेवल : कविता
सुनीता शानू
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ऎक कविता के माध्यम से कुछ कहना चाहा है...देखिये सफ़ल भी हुई हूँ कि नही...फ़िर चली आँधी किउड़ चले पत्ते सभीचरमराया पेड़ ऒकुछ डालियाँ भी टूटे तभीचीं-चीं, चीं-चीं की चीत्कारजब फ़ैली आकाश मेंहो गई तत्काल गुमकिसी अविश्वास में जैसे गिरा घोंसला उसकाटूट गया विश्वास तभीटूट गये...
 पोस्ट लेवल : कविता
सुनीता शानू
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अब ये रस्में-मोह्ब्ब्त भुला दीजियेउनके ख्वाबों को दिल से हटा दीजियेअश्क आँखों में देकर ये कहते हैं वोचाहतों को भी अपनी भुला दीजियेकल ही महफिल में रुसवा किया था हमेंअब वो कहते है हमको वफ़ा दीजियेअपने ही जिस्म में अब न लगता है मनउनके दिल को कोई घर नया दीजियेऔर कब तक...
 पोस्ट लेवल : कविता