ब्लॉगसेतु

सुनीता शानू
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आँखों ने आँखों से कह दिया सब कुछमगर जुबाँ खामोश रही...जब दिल ने दिल की सुनी आवाज़धड़कन खामोश रही...आँखो के रास्ते दिल में उतरने वाले ऎ मुसाफ़िरअब बाहर जा नही सकतेतुम्हारे प्यार की खुशबू से तृप्त उठती गिरती साँसे देख करअब पलके बंद हो गई...सुनीता शानू
 पोस्ट लेवल : कविता
सुनीता शानू
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दोस्तों होली का त्यौहार आप सबके जीवन में खुशियाँ लाये यही मनोकामना है...भंग की तरंग ढोलक और मॄदंगहोली के रंगनाचे संग-संग .....फ़ागुन के दोहेडाल-डाल टेसू खिले,आया है मधुमास,मै हूँ बैठी राह में,पिया मिलन की आस।हो रे पिया मिलन की आसफ़ागुन आया झूम के ऋतु वसन्त के साथतन-म...
 पोस्ट लेवल : कविता
girish billore
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होली तो ससुराल की बाक़ी सब बेनूर सरहज मिश्री की डली,साला पिंड खजूर साला पिंड-खजूर,ससुर जी ऐंचकताने साली के अंदाज़ फोन पे लगे लुभाने कहें मुकुल कवि होली पे जनकपुर जाओ जीवन में इक बार,स्वर्ग का तुम सुख पाओ..!! ######### होली तो ससुराल की बाक़ी सब बेनूर...
अनीता कुमार
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अहिल्या बना दो न हूँ तो साधारण सा पत्थरगोला गया ठोकरें खा खापगली, तुम समझीं मैं अहिल्यानित तुम्हारी वंदना पातापर कुछ न कह पाताभ्रमित पुजारी देख अक्षत, रगोंली,तुम भी धोखा खा गयेरास्ते का पत्थर जड़ दिया मंदिर के प्राचीर मेंये पगली पुजारन फ़िर भी न मानीकरती रही नित सांझ...
 पोस्ट लेवल : कविता
सुनीता शानू
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एक औरत और नदी में क्या अन्तर है?क्या उसका अपना अस्तित्व बाकी रहता है समुन्दर रूपी पुरूष से मिलकर ?क्या विवाह के बाद भी वह, वह रह पाती है जो पहले थी?क्यों उसे ही बदलना पड़ता है, यहाँ तक की जन्म से जुड़ा नाम तक बदल जाता है...-मै और तुम--बँध गये हैं एक अदृश्य बंधन में.....
 पोस्ट लेवल : कविता
सुनीता शानू
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वेलन्टाईन डे पर संत वेलनटाईन को मेरी श्रद्धांजली....रोक सकेगा कौन इन्हेये आंधी और तूफ़ान हैचल रहे है भेड़ चाल येआजकल के नौजवान है...पहले पहल ये परफ़्यूम देकरअपना प्यार दिखाते हैकिस डे पर भी किस देकरसबसे प्यार जताते हैहग डे पर भी गले मिलकरबन जाते है अपने सेवेलन्टाईन डे...
 पोस्ट लेवल : कविता
अविनाश वाचस्पति
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पीरहरण प्रक्रिया धेर्यधारणहाथ कंगन को आरसी क्याआर सी रिलायंस कम्युनिकेशन भी बह गयाइस बहाव मेंबच न सका कोई इस तूफान मेंअब जो धीर धरोगेवही पीर हरेगी.
 पोस्ट लेवल : रिलायंस पीरहरण कविता
महेश कुमार वर्मा
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सुनो सुनो ऐ दुनिया वालों आओ सुनो मेरे देश की कहानीजहाँ रोज होती है घोटाला और होती है बेईमानीऔर कुछ हो या ना हो भ्रष्टाचार ही है देश की निशानीसुनो सुनो ऐ दुनिया वालों आओ सुनो मेरे देश की कहानीबेईमानी, भ्रष्टाचार, घुसखोरी और अत्याचारइसी पर तो टिकी है इस देश की सरकारन...
 पोस्ट लेवल : कर्म कविता अपराध
अविनाश वाचस्पति
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हि हि हिचकोलेहिचकोले खा रहा देखो बाजारचल रही हो ज्यों गर्भिणी नार पंचर टायर पर चल रही कारसरपर पड़ रही ओलों की मारबाजार नहीं अब तो है बेजारएफआईआई जिसका कलाकार औंधे मुंह गिरे सांड खूब सोले बाजार पेटभर अब तू भी रोलेसांड बेचारा क्या मुंह से बोले जब लग रहे हों तेज हिचको...
महेश कुमार वर्मा
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कहाँ जाऊंगा मैं तुम्हें छोड़कर नहीं रह सकता में तुमसे नाता तोड़कर चले न जाना तुम मेरा दिल तोड़कर आ जाना तुम मेरा अपना बनकर जी नहीं सकता मैं तुम्हें छोड़कर जी नहीं सकता मैं तुम्हें छोड़कर
 पोस्ट लेवल : कविता