ब्लॉगसेतु

महेश कुमार वर्मा
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गणतंत्र दिवस है आया सोचने पर हमने है विचारा है नहीं यहाँ बच्चों को पढने का अधिकार है नहीं बच्चों को खेलने का अधिकार बच्चे करते हैं होटल में काम बेचते हैं रेल पर नशा तमाम देखने वाला नहीं है कोई उसे फिर हमने देश को गणतंत्र माना कैसे गणतंत्र दिवस है आया सोचने पर हमने...
Mithilesh Dhar Dubey
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बहुत दिंनो से देख रहा हूँ कि टिप्पणी को लेकर ब्लोगजगत में काफी उधम मचा हुआ है, कोई ब्लोगिंग ही छोड़ कर जा रहा,, कारण बस टिप्पणी ना मिलना । कभी-कभी लगता है कि टिप्पणी हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, लेकिन क्या टिप्पणी मात्र से ही कविता या अन्य विधा का मूल्यांकन हो...
 पोस्ट लेवल : कविता
ललित शर्मा
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अखबारी कविता-रद्दी पेप्योर से उठाए गए शीर्षक-आशीर्वाद चाहुंगा आक्रामक तेवरनही चलाने देगें टैक्सीसरकार का कोईलेना देना नहीसबसे बड़ी गिरावटइस साल कीएक औरटैक्सी चालक पर हमलाधुमिल होती छविएक्सरसाईज सेपाएं चेहरे मे रौनकये काले दागहटेंगे कैसे?इंसानो जैसे दुसरों परनही...
ललित शर्मा
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बसंतागमनजुझ रही हैं कोहरे से सुर्यकुमारियाँ किसी मजदुर की तरह एक जुन की रोटी के लिए बोझा ढोता एटलसपृथ्वी का भारकांधे  पर लादेचलता है अनवरतभुख मिटाने के लिएपर्चे बांटे जा रहे हैंबाजार मेभुख मिटाने वालासल्युशन बनकर हैतैयारअब बोझा उतार दोएटलसआ...
ललित शर्मा
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सुरसा मुख सीबढती मंहगाईकोल्हु के बैल कंधों परगृहस्थी का जुड़ा डालेप्राण वायु मे घुलता जहररसायन से मौत उगलते खेतबोझ से झुकी कमरदीमक लगी उमरजो नित चाट रहीजीवन रेखाघुटने साथ नही देतेलेकिनवो कहते हैंबसंत बुढा नही होताकोई उनसे पूछेमोतियाबिंद सेअंधी हुई आंखे लेकरमधुमेह ग्...
girish billore
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 पोस्ट लेवल : हिन्दी कविता
ललित शर्मा
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आज बसंत पंचमी है और प्रकृति का सबसे सुहाना मौसम प्रारंभ हो रहा है। कवियों इस मौसम का गुणगान करते हुए ना जाने कितने ग्रथ रच दिए। इस मौसम का आनंद ही कुछ और है। बस कुछ दिन बाद पलास के फ़ुल खिलेंगे एक हरितिमा मिश्रित लालिमा से धरती का श्रृंगार होगा। महुआ के फ़ुल झरेंगे ज...
वंदना अवस्थी दुबे
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वैसे तो महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" का जन्म 21 फरवरी को 1896 में पश्चिमी बंगाल के मेदिनीपुर जिले के महिषादल नामक देशी राज्य में हुआ था, लेकिन उस दिन वसंतपंचमी थी. माँ सरस्वती ने प्रकृति का कैसा अनुपम उपहार दिया साहित्य-जगत को. वसंत पंचमी के अवसर पर निराला...
 पोस्ट लेवल : निराला की कविता.
ललित शर्मा
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कोहरे का कहरटिक ना सकाधरती परछोटी-छोटीकिरणो नेएक होकरजीत लिया युद्धअंधेरे सेसुर्योदय हुआआपका शिल्पकार
ललित शर्मा
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आज सुबह का अखबार उठाया और पढने लगा, उसके शीर्षकों पर ध्यान दिया तो थोड़ी मेहनत से कुछ क्षणिकाओं का जन्म हुआ, बस यूँ ही बन गई. आपसे आशीर्वाद चाहूँगा.(१)इस बार का बजट चुनौती पूर्ण अर्थ शास्त्री ने दिये अर्थ मंत्र नि:शुल्क प्लास्टिक सर्जरी कराए...