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sanjiv verma salil
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ॐकवित्त*शिवशंकर भर हुंकार, चीन पर करो प्रहार, हो जाए क्षार-क्षार, कोरोना दानव।तज दो प्रभु अब समाधि, असहनीय हुई व्याधि, भूकलंक है उपाधि, देह भले मानव।।करता नित अनाचार, वक्ष ठोंक दुराचार, मिथ्या घातक प्रचार, करे कपट लाघव।स्वार्थ-रथ हुआ सवार, धोखा दे करे वार, सिंह नही...
 पोस्ट लेवल : कवित्त
sanjiv verma salil
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कवित्त घनाक्षरी विविध भाषाओँ मेंलाख़ मतभेद रहें, पर मनभेद न हों, भाई को हमेशा गले, हँस के लगाइए|लात मार दूर करें, दशमुख सा अनुज, शत्रुओं को न्योत घर, कभी भी न लाइए|भाई नहीं दुश्मन जो, इंच भर भूमि न दें, नारि-अपमान कर, नाश न बुलाइए|छल-छद्म, दाँव-पेंच, दन्द-फंद अपना...
sanjiv verma salil
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मुक्तक जी से लगाया है जी ने जो जी को जी में बसाया है जी ने भी जी कोजीना न आया, जीना गए चढ़ जी ना ना जी के बिना आज जी कोकवित्त *राम-राम, श्याम-श्याम भजें, तजें नहीं काम ऐसे संतों-साधुओं के पास न फटकिए। रूप-रंग-देह ही हो इष्ट जिन नारियों...
 पोस्ट लेवल : कवित्त muktak kavitta मुक्तक
sanjiv verma salil
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एक रचना*राम कहे राम-राम, सिया कैसे कहें राम?,                          होंठ रहे मौन थाम, नैना बात कर रहे।मौन बोलता है आज, न अधूरा रहे काज,                 ...
sanjiv verma salil
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 घनाक्षरी- संजीव 'सलिल'०३. फूँकता कवित्त प्राण, डाल मुरदों में जान, दीप बाल अंधकार, ज़िन्दगी का हरता।           नर्मदा निनाद सुनो,सच की ही राह चुनो, जीतता सुधीर वीर, पीर पीर सहता।।    &n...
हिमांशु पाण्डेय
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शैलबाला शतक के छन्द पराम्बा के चरणों में अर्पित स्तवक हैं। यह छन्द विगलित अन्तर के ऐकान्तिक उच्छ्वास हैं। इनकी भाव भूमिका अनमिल है, अनगढ़ है, अप्रत्याशित है। भोजपुरी भाषा के इच्छुरस का सोंधा पाक हैं यह छन्द। इस रचना में भोजपुरी की लोच में, नमनीयता में सहज ही ओज-प्रा...
हिमांशु पाण्डेय
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शैलबाला शतक नयनों के नीर से लिखी हुई पाती है। इसकी भाव भूमिका अनमिल है, अनगढ़ है, अप्रत्याशित है। करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं शैलबाला शतक के यह छन्द! शैलबाला-शतक के प्रारंभिक चौबीस छंद कवित्त शैली में हैं। इन चौबीस कवित्तों में प्रारम्भिक आठ कवित...
हिमांशु पाण्डेय
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शैलबाला शतक नयनों के नीर से लिखी हुई पाती है। इसकी भाव भूमिका अनमिल है, अनगढ़ है, अप्रत्याशित है। करुणामयी जगत जननी के चरणों में प्रणत निवेदन हैं शैलबाला शतक के यह छन्द! शैलबाला-शतक के प्रारंभिक चौबीस छंद कवित्त शैली में हैं। इन चौबीस कवित्तों में प्रारम्भिक आठ कवित...
sanjiv verma salil
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कवित्त *राम-राम, श्याम-श्याम भजें, तजें नहीं काम ऐसे संतों-साधुओं के पास न फटकिए। रूप-रंग-देह ही हो इष्ट जिन नारियों का भूलो ऐसे नारियों को संग न मटकिए।।प्राण से भी ज्यादा जिन्हें प्यारी धन-दौलत होऐसे धन-लोलुपों के साथ न विचरिए।जोड़-तोड़ अक्षरों क...
 पोस्ट लेवल : कवित्त संजीव kavitta sanjiv
sanjiv verma salil
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कवित्त *राम-राम, श्याम-श्याम भजें, तजें नहीं काम ऐसे संतों-साधुओं के पास न फटकिए। रूप-रंग-देह ही हो इष्ट जिन नारियों का भूलो ऐसे नारियों को संग न मटकिए।।प्राण से भी ज्यादा जिन्हें प्यारी धन-दौलत होऐसे धन-लोलुपों के साथ न विचरिए।जोड़-तोड़ अक्षरों क...
 पोस्ट लेवल : कवित्त संजीव kavitta sanjiv