ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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ॐकवित्त*शिवशंकर भर हुंकार, चीन पर करो प्रहार, हो जाए क्षार-क्षार, कोरोना दानव।तज दो प्रभु अब समाधि, असहनीय हुई व्याधि, भूकलंक है उपाधि, देह भले मानव।।करता नित अनाचार, वक्ष ठोंक दुराचार, मिथ्या घातक प्रचार, करे कपट लाघव।स्वार्थ-रथ हुआ सवार, धोखा दे करे वार, सिंह नही...
 पोस्ट लेवल : कवित्त
ऋता शेखर 'मधु'
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(हे! अम्बिके जगदम्बिके तुम, विश्व पालनहार हो।)हे! अम्बिके जगदम्बिके तुम, विश्व पालनहार हो।आद्या जया दुर्गा स्वरूपा, शक्ति का आधार हो।*शिव की प्रिया नारायणी, हे!, ताप हर कात्यायिनी।तम की घनेरी रैन बीते, मात बन वरदायिनी।।।भव में भरे हैं आततायी, शूल तुम धारण करो।हुंका...
shashi purwar
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1जीवन में कुछ बनना है ,तो लिखना पढना जरुरी है रोज नियम से अभ्यास करो मन लगाकर ही पढना गर्मी की छुट्टी आये ,तब खूब धमाल करना न मेहनत से जी चुराओ ज्ञान लेना भी जरुरी है . झूठ कभी मत बोलना , तुम सच्चाई का थामो हाथ नेक राहों पर चलने से ,बड़ो का मिलता है ,आशीर्वाद ...
 पोस्ट लेवल : कविताएँ
Bharat Tiwari
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कौन जो बतलाये सच— गिरधर राठी विडियो: विशाख राठी०००००००००००००००० (function(i,s,o,g,r,a,m){i['GoogleAnalyticsObject']=r;i[r]=i[r]||function(){ (i[r].q=i[r].q||[]).push(arguments)},i[r].l=1*new Date();a=s.createElement(o), m=s.getElementsByTagName(o)[0]...
सुनीता शानू
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मोहब्बत के अवशेषसब कुछ खत्म होने के बाद भीकुछ अवशेष बचे रह जाते हैं जो बताते हैं कि खत्म कुछ नहीं होतारबर से मिटाने पर भी काग़ज़ परअक्षर अपना निशान छोड़ जाते हैंवैसे ही तुम्हारा आना औरमेरी प्रोफाइल में झांकना दर्ज होगा एक सदी मेंकि यह तुम्हारे सकुशल होने का सं...
 पोस्ट लेवल : कविता ख़त प्रेम
ऋता शेखर 'मधु'
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मन पाखी पिंजर छोड़ चलामन पाखी पिंजर छोड़ चला।तन से भी रिश्ता तोड़ चला ।।जीवन की पटरी टूट गयी ।माया की गठरी छूट गयी ।अब रहा न कोई साथी है,मंजिल पर मटकी फूट गयी।।निष्ठुरता से मुँह मोड़ चला ।मन पाखी पिंजर छोड़ चला ।।जीवन घट डूबा उतराया ।माँझी कोई पार न पाया ।शक्ति थी पँखों...
 पोस्ट लेवल : कविता गीत सभी रचनाएँ
Meena Bhardwaj
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बेमुरव्वत सी इस दुनिया में ,खुद को हम बहलाये कैसे ?जीवन बगिया उलझा मांझा , उलझन को सुलझाये कैसे ?नहीं टूटती मन की चुप्पी ,आस-पास में लोग बहुत है ।फिरते लादे दिल पर बोझा ,किस को सुनने की फुर्सत है ।बीते जिस पर वो दिल जाने ,खुद को वो समझाये कैसे ?जीवन बगिया उलझा...
 पोस्ट लेवल : कविताएँ
kumarendra singh sengar
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कल रात नियमित भ्रमण पर हमारीवाणी पर टहलना हो रहा था. अभी ज्यादा दूर जाना नहीं हो सका था कि एक पोस्ट का शीर्षक हमें अपनी कविता जैसा दिखा. ब्लॉगर का नाम भी पहचाना हुआ था. इसलिए लगा नहीं कि हमारी कविता वहाँ पोस्ट की गई होगी. इसके बजाय लगा कि कहीं हमारी कविता के बारे म...
ऋता शेखर 'मधु'
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क्या तेरा है क्या मेरा हैदुनिया तो रैन बसेरा हैक्या तेरा है क्या मेरा है|यह घर कुछ दिन का डेरा है|साथ चलेंगे कर्म हमारे,यह पाप-पुण्य का फेरा है||मानवता का साथी बनकर,मिल जाता नया सवेरा है |दुनिया तो रैन बसेरा है ||१दुनिया में हर दीन-दुखी को,गले लगाकर के चलना है|बिन...
 पोस्ट लेवल : कविता गीत सभी रचनाएँ
usha kiran
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इससे पहले कि फिर सेतुम्हारा कोई अज़ीज़तरसता हुआ दो बूँद नमी कोप्यासा दम तोड़ देसंवेदनाओं की गर्मी कोकाँपते हाथों से टटोलताठिठुर जाए औरहार जाए  जिंदगी की लड़ाईकि हौसलों की तलवारखा चुकी थी जंग...इससे पहले कि कोईअपने हाथों चुन लेफिर से विरामरोक दे अपनी अधूरी यात्...
 पोस्ट लेवल : कविता