ब्लॉगसेतु

Rajeev Upadhyay
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लोकतंत्र के लुच्चों, दगाबाज टुच्चों! ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और हरिजन, जब हम हार गए तो काहे का इलेक्शन, जिस देश की जनता हो तुम जैसी वहां काहे की डेमोक्रेसी? भितरघातियो, जयचंद के नातियों! तुमने अंगूरी पीकर अंगूठा दिखाया है, आज मुझको नहीं मिनी महात्मा गांधी को हराय...
 पोस्ट लेवल : माणिक वर्मा कविता
Meena Bhardwaj
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पूरे दिन की नीरवताऔर गोधूलि से पूर्वमंदिरों की सांध्य आरती सीघंटे ,शंख और थाली की गूंज….,बालकॉनी रुपी आंगन और छत सेझांकते चेहरे हाथों में थामेंप्लेटेंं-चम्मचऔर बजाते तालियांअचानक ऊँची ऊँची इमारतेंबन गई गंगा घाट..जहाँ सांध्य आरती मेंआध्यात्म और भौतिक जगतबिना कि...
 पोस्ट लेवल : कविताएँ
jaikrishnarai tushar
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श्री नरेंद्र मोदी जीप्रधानमन्त्रीभारत सरकार मोदी जी भारत के अप्रतिम जननायक हैं ,प्रधानमन्त्री हैं |आज प्रधानमन्त्री जी ने फिर एक असम्भव कार्य संभव कर दिखाया जनता कर्फ्यू लगाकर \ जनता कर्फ्यू वैसे तो कोरोना के विस्तार को रोकने के लिए लगाया गया है किन्तु इसके अन...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कविता ग़ज़लें
sanjiv verma salil
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मुक्तिका*खर्चे अधिक आय है कम.दिल रोता आँखें हैं नम..*पाला शौक तमाखू का.बना मौत का फंदा यम्..*जो करता जग उजियाराउस दीपक के नीचे तम..*सीमाओं की फ़िक्र नहीं.ठोंक रहे संसद में ख़म..*जब पाया तो खुश न हुए.खोया तो करते क्यों गम?*टन-टन रुचे न मन्दिर की.रुचती कोठे की छम-छम.....
YASHVARDHAN SRIVASTAV
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(चित्र साभार: हिन्दी समाचार)पानी जिसने इसकी कदर ना जानी उसको सिर्फ येबात बतानीकविता समझोया कहानीमुझे तो बस अपनी बात समझानी पानी यह सिर्फशब्द नहीं है इसकी कीमत बहुतबड़ी कभी इसके बिना भी दो दिन रहे हो अगर रहे हो तो बता देनाशायद तुमको इसकी कीमत ज्यादा पता होपर मै एक ब...
दिनेशराय द्विवेदी
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_________ दिनेशराय द्विवेदीएक तरह के लोग सोचते हैं-कोई है जिसने दुनिया बनाईफिर दुनिया चलाईवही है जो दुनिया चला रहा हैवे उसे ईश्वर कहते हैं।दूसरी तरह के लोग सोचते हैं-ऐसा कोई नहीं जो दुनिया बनाए और उसे चलाएदुनिया तो खुद-ब-खुद हैहमेशा से और हमेशा के लिएवह चलती भ...
sanjiv verma salil
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एक रचना*विश्व में कविता समाहितया कविता में विश्व?देखें कंकर में शंकर या शंकर में प्रलयंकरनाद ताल ध्वनि लय रस मिश्रितशक्ति-भक्ति अभ्यंकरअक्षर क्षर का गान करे जबहँसें उषा सँग सवितातभी जन्म ले कविताशब्द अशब्द निशब्द हुए जबअलंकार साकार हुए सबबिंब प्रतीक मिथक मिल न...
 पोस्ट लेवल : कविता
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कविता
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कविता