ब्लॉगसेतु

ललित शर्मा
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हमारे गांव में एक होटल हैं बस स्टेंड में उसके मालिक बहुत ही सज्जन हैं,एक अघोषित वैराग उन पर हमेशाचढा रहता हैं ,जब भी जाओ तो वे अपने ध्यान में ही मगन रहते हैं,उनको सुबह उनके घर के लोग याद दिलातेहैं के"चलो सुबह हो गयी हैं अब जाकर ढाबा खोलना हैं,तब वो ढाबा पहुचते हैं,...
 पोस्ट लेवल : ललित शिल्पकार कविता
अविनाश वाचस्पति
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नुक्‍कड़ सर्वोत्‍तम बाल कविता सम्‍मान अपनी सर्वोत्‍तम एक कविता भेजिए 24 सितम्‍बर 2009 तक आज हो गई है बीस सितम्‍बर फिर मत कहना भूल गए नेट खोलते हैं जिस काम के लिए उसे छोड़ सभी काम निपटाते हैं बच्‍चों की कविता भेजनी है कवि तो बड़े भी हैं पर बड़े भी भूल जाते हैं जिन्‍...
ललित शर्मा
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जाग मुसाफिर नाव लगी हैं तुझे जाना हैं उस पारअरे छोड़ मोह कांकर पाथर का झटपट होले सवाररे बन्दे जाना भवपारइस नाव का नहीं किराया,सबका दाता हैं करतारजाते ही तुझको गले लगाए, वो ऐसा हैं भरताररे बन्दे जाना हैं भवपार जिस पर तुझको बड़ा गरब हैं ,वो नरतन हैं बेकारजिस दिन...
ललित शर्मा
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हंसा चल रे अपने देशऊँची उडान भर नील गगन की रहे न कुछ भी शेषहंसा चल रे अपने देशयहाँ नहीं हैं कोई अपना सारा जग बीरानासारे हैं सब झूठे नाते नहीं हैं कोई ठिकानाबहरुपीयों की नगरी में धर ले असली भेषहंसा चल रे अपने देशकैसे उडेगा कागा मन का भिष्ठा में बैठा हैंकरके अपनी मोत...
 पोस्ट लेवल : देश हंसा कविता
महेश कुमार वर्मा
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नमस्कार।आज से शारदीय नवरात्र आरंभ हो गया है। और इसके साथ ही दशहरा व दुर्गा पूजा का पर्व का भी शुभारंभ होगया। इस खुशी के माहौल में और भी खुशी आ गयी कि दो दिनों के बाद आपसी प्रेम व भाईचारा का पवित्र पर्व ईदहै। इन खुशी व पवित्र पर्व के अवसर पर आम जनों से मेरा आग्रह...
ललित शर्मा
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बाबुल मोरी डोली सजाओ सारी सहेलियां ब्याह गयी हैं,मुझको भी परणाओबाबुल मोरी डोली सजाओ हाथ पीले कर दो मेरे अब तुम ना ये भार रखोमैं भी पहनू लाल चुनरिया नौ लखा तुम हार करोनाक में नथली पग में पायल मुझको भी पहनाओबाबुल मोरी डोली सजाओ मेरे फेरों के मंगल मंडप में सुन्दर फूल...
Alpana Verma
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'जाने क्या चाहे मन बावरा' -एक फ़िल्मी गीत की पंक्तियाँ हैं..सुनती हूँ तो सोचती हूँ कि आखिर यह मन है क्या?किसकी परिभाषा मानी जाये..एक मनोचिकित्सक की?या 'कथित मनोरोगी' की?दोनों ही अपने ढंग से इस मन को समझते और समझाते हैं..मैं तो मन को एक पिक्चर puzzle मानती हूँ.. .या...
महेश कुमार वर्मा
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क्यों खफा हो मुझसे यह तो बताक्यों चुप हो यह तो बता तुम्हारी चुप्पी मेरे दिल में यों चुभती है जिसका वर्णन मैं कर सकता नहीं फिर भी इस आश के साथ जिन्दा हूँ कि तुम्हारी चुप्पी टूटेगी और एक दिन तुम मेरे साथ दोगे मेरे साथ दोगे व मेरे दर्द सुनोगे मेरे दर्द सुनोगे व उसे...
 पोस्ट लेवल : कविता
ललित शर्मा
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ओ!!! मेरे प्रियतम सजना लौट के आ घर दूर नहीबात जोह रही राह है तेरीआ जा अब तू जरुर यहीं बालकपन का भोला बचपनरह-रह याद दिलाता है गांव पार का बुढा बरगदतुझको रोज बुलाता है खेलकूद कर जिस पर तुनेयौवन पाया जरुर यहीं ओ!!!!मेरे परदेशी सजना...... पनघट की जिस रा...
Alpana Verma
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वास्तविक जीवन में यूँ तो हर रिश्ते की अपनी एक पहचान होती है उनकी एक नज़ाकत होती है ,अधिकार और अपेक्षाओं से लदे भी होते हैं .एक कहावत भी है 'जो पास है वह ख़ास है'.यथार्थ से जुड़े और जोड़ने वाले इन रिश्तों से परे होते हैं -कुछ और भी सम्बन्ध !जो होते हैं कुछ खट्टे , क...