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PRABHAT KUMAR
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जब मौसमों की तारीफ में उसके वस्ल का कारण निहित होतो हिज्र के आगोश में सब अच्छा कहाँ होगा#हिज्र- वियोग#वस्ल-संयोग#प्रभातPrabhat
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PRABHAT KUMAR
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चिंतन, मनन, उदासी, क्रंदन सबकी अलग कहानी हैवर्षों हुये करुणा में डूबे व्यथा वही पुरानी हैसागर, नदी, तालाब, गगन हर ओर अंधेरा छाता हैविस्मय करती नहीं बाधाएं सब कुछ आता जाता हैहां मन बोझिल, तितर बितर अंदर ही घुटता रहता हैजब भी देखूँ आलिंगन को तो आंसू भी बहता रहता हैहा...
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PRABHAT KUMAR
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बहुत अंधेरी रात और गलियां बिल्कुल सूनी हैंस्ट्रीट लाइट्स बंद पड़े हैंशहर में बाहर बस एक लंगड़ी कुतिया हैकुछ दुबले पतले जानवर भी जुगाली कर रहे हैंये उसी स्वप्न की बात है जिसमें मैं दुनिया में अकेला था आज वही सब देख रहा हूँ, क्या आप भी देख रहे हैं?दिन भर भूख की चि...
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PRABHAT KUMAR
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एक शहर की ओर प्रस्थान कर गया थातन पर लिपटे कपड़े की तरह मासूमों को बोझ बनाकर|मौसम प्रतिकूल था,बारिश का मौसम कभी तो कभी गर्मी में लू का कहरलेकिन मेरे छत पर वही खाली आसमान और मेरे नीचे खाली जमीन थी|ठंड में मैं हथौड़े चलाता, और गर्मी में भट्टियों में रोटी सेंकता...पत्नी...
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PRABHAT KUMAR
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कुछ रंग उन्हीं मिट्टी के हों जिस मिट्टी में हमने खेला होहर रंग उन्हीं मौसम के हों जिस मौसम में रंग बिखरा होवो कौन सी बात बड़ी है जिसमें रंगीन अदाएं उभरी होंवो हर बात बड़ी है जो भूली बिसरी स्मृतियों से भरी होंआगे आप पूरी करें....#प्रभातPrabhat
PRABHAT KUMAR
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एक दीप जो मेरे अन्दर है वह जल रहा हैलेकिन उसकी लौ में कीट पतंगे जल रहे हैंऔर मैं हवा के इंतजार में हूँ, सोच रहा हूँ कि वो आयेजबकि मुझे पता है कि इसके बाद घनघोर अंधेरा होगा#प्रभातPrabhat
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PRABHAT KUMAR
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कुछ कहना है तो मत कहोआजाद रहो बस घर तकबाहर न जाओ दूर तलक पहरा हैफेसबुक पर भी न आओकुछ कहना है तो मत कहोघुट घुट कर मर जाओ बेशकलेकिन कुछ लिख मत देनाकुछ लिखकर रखना मगरउसे किसी को न पढ़ानाजागरूक करना हो तो मत करोकुछ कहना है मत कहोवो कह रहे हैं जो करते रहोमूत्र को अमृत बत...
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PRABHAT KUMAR
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सत्ता से डरकर अगर आप कुछ करते होसत्ता से डरकर अगर आप कुछ कहते होसत्ता से डरकर अगर आप चुप रहते होतो आप के अस्तित्व पर सवाल है?हां सवाल उन पर भी है जो भीड़ की बजाय अकेले कुछ कहने निकलते हैंअकेले ही रणभूमि में जाकर मारे जाते हैंअकेले ही सच को सच कहना शुरू कर देते हैंकि...
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PRABHAT KUMAR
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देश में अब क्या इतने ही स्तम्भ हैं? लोकतंत्र या अँधेरतंत्र है?अपनी फाइल में हिन्दू मुस्लिमऔर सच को झुठलाने वालीझूठ को सच बताने वालीसरकारों की कठपुतली हैलाठी लेकर भी लड़खड़ाती हैवो अपने को पुलिस बताती हैभड़काऊं बयानों के घेरे मेंवो चंद महीनों की रैली मेंहिन्दू मुस्लिम...
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PRABHAT KUMAR
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ये सरकार नहीं है बेचारी जिसको जनता की जान नहीं है प्यारीबहुत बड़ी लाचारी देश में सब जल रहा है उनको है कुर्सी प्यारीवो कहते हैं वोट मिला है जो चाहूं वो कानून बनाऊंवो कहते हैं कुछ भी कर लो मैं वो नहीं जो इंच भर हट जाऊंवो कहते हैं कपड़े से पहचानों जो सामने आए मारोवो कहत...
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