ब्लॉगसेतु

PRABHAT KUMAR
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बड़ी कशमकश सी है कि क्या लिखूं, कैसे शुरू करूं। लिखूँ भी या न लिखूँ या किसी चीज को दफन हो जाने दूं।इसलिए जो लिख रहा हूँ अब मैं वो अपने लिए। अपने आपके लिए लिखूँ तो ही बेहतर है...तो सुनो प्रभात तुम्हें मैं तुम से भी संबोधित कर सकता हूँ और आप से भी। तुम्हें मैं दुत्कार...
 पोस्ट लेवल : बड़ी कशमकश सी है चिंतन
Sanjay  Grover
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वामपंथी बायीं तरफ़ जाएं।दक्षिणपंथी दायीं तरफ़ जाएं। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({ google_ad_client: "ca-pub-9126168104576814", enable_page_level_ads: true...
sanjiv verma salil
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sanjiv verma salil
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तीन मुक्तक- *मौजे रवां१ रंगीं सितारे, वादियाँ पुरनूर२ हैंआफ़ताबों३ सी चमकती, हक़ाइक४ क्यों दूर हैंमाहपारे५ ज़िंदगी की बज्म६ में आशुफ्ता७ क्यों?फिक्रे-फ़र्दा८ सागरो-मीना९ फ़िशानी१० सूर हैं१. लहरें, २. प्रकाशित, ३. सू...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लभीड़ जब ताली देती है हमारा दिल उछलता हैभीड़ जब ग़ाली देती है हमारा दम निकलता हैहमीं सब बांटते हैं भीड़ को फिर एक करते हैंकभी नफ़रत निकलती है कभी मतलब निकलता हैहमीं से भीड़ बनती है हमीं पड़ जाते हैं तन्हामगर इक भीड़ में रहकर बशर ये कब समझता हैवो इक दिन चांद की चमचम के आ...
अजय  कुमार झा
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आपको क्या लगता है ???समाज में जिस तेज़ गति से बढते अपराधों की खबर , पढने , सुनने और देखने को मिल रही है , उससे मैं ठीक ठीक तय नहीं कर पा रहा हूं कि कौन किससे इंस्पायर हो रहा है , खबरों के अपराधप्रेम से अपराध बढ रहे हैं या बढते अपराध के कारण अपराध खबरों का दायरा बढ र...
अजय  कुमार झा
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ई मंदिर बिरादती के बिल गेट्स हैं  . जी जी तिरूपति बाला जी .की.जय हो जिस तरह से मंदिरों के गर्भगृहों से अकूत धन दौलत और संपदा निकल रही है उसने मेरे इस विश्वास को और भी पुख्ता किया है कि , आज देश की बदहाली और पिछडेपन में जिन आपराधिक आर्थिक कारणों का हाथ रहा...
अजय  कुमार झा
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भटिंडा ,पंजाब से प्रकाशित दैनिक "पायलट " के इस अंक में स्तंभ ब्लोग हलचल में माधुरी प्रकरण पर आधारित कुछ पोस्टों की चर्चा । चित्र को पढने के लिए उसे चटकाएं और छवि...