ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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भारत विभाजन का दर्दएक सिलसिले का अंत— वीना करमचंदाणीवीना करमचंदाणी की कवितायेँ शब्दांकन पर पहले प्रकाशित हुई हैं. पिछले दिनों जयपुर की यात्रा के दौरान उनसे जवाहर कला केंद्र में छोटी-सी मुलाक़ात भी हुई. इधर जब विभाजन से जुड़ा साहित्य शब्दांकन पर उन्होंने पढ़ा तो उ...
Bharat Tiwari
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भारत पाकिस्तान विभाजन की कहानियाँ' ' लाजो ' '— ज्योति चावलाडॉक्टरों का कहना है कि उनका सोडियम बढ़ गया है। ऐसी हालत में ही मरीज़ बड़बड़ाया करते हैं। और बगल में खड़ी मैं सोच रही हूं कि इसका मतलब नानी का सोडियम तो बरसों से बढ़ा हुआ है क्योंकि वे तो बरसों से बड़बड़ा रही हैं। अ...
Bharat Tiwari
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हंस मार्च 2020 में प्रकाशित कहानीविभाजन की कहानियाँदुखां दी कटोरी: सुखां दा छल्लारूपा सिंह  बेबे की गरम और नरम छातियों के बीच दुबककर सो जाना, कूबड़ पर हाथ रखते ही छुहारों और बताशों की मिठास से मुंह गीला होना अमृतसर की गलियों का सोंधापन, बेबे की कुंडल के लश...
राजीव सिन्हा
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पढ़ें सिर्फ: 4 मिनट में हिमालय पहाड़ पर अल्मोड़ा नाम की एक बस्ती है। उसमें एक बड़े मियाँ रहते थे। उनका नाम था अब्बू खाँ। उन्हें बकरियाँ पालने का बड़ा शौक था। बस एक दो बकरियाँ रखते, दिन भर उन्हें चराते फिरते और शाम को घर में लाकर बाँध देते। अब्बू गरीब थे और भाग्य भी उनक...
 पोस्ट लेवल : कहानियाँ बाल कथाएँ
राजीव सिन्हा
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पढ़ें सिर्फ: 15 मिनट में आँगन में वह बास की कुर्सी पर पाँव उठाए बैठा था। अगर कुर्ता-पाजामा न पहले होता तो सामने से आदिम नजर आता। चूँकि शाम हो गयी थी और धुँधलका उतर आया था, उसकी नजर बार-बार आसमान पर जा रही थी। शायद उसे असुविधा हो रही थी। उसने पाँव कुर्सी से नीचे उता...
राजीव सिन्हा
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पढ़ें सिर्फ: 31 मिनट में आज स्कूल का वार्षिक फंक्शन है, सुबह सात बजे से मैं यहीं हूं… सारी तैयारियां अपने चरम पर हैं। रिहर्सल जितनी होती थी, हो चुकी। पिछले महीने तो मैंने पांच-पांच, छ:-छ: घंटे रिहर्सल करवायी है, जब तक बच्चे थककर चूर नहीं हो जाते। सुबह सात से...
राजीव सिन्हा
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पठन समय: 23 मिनट पंडित अयोध्यानाथ का देहांत हुआ तो सबने कहा, ईश्वर आदमी की ऐसी ही मौत दे। चार जवान बेटे थे, एक लड़की। चारों लड़कों के विवाह हो चुके थे, केवल लड़की क्‍वाँरी थी। संपत्ति भी काफ़ी छोड़ी थी। एक पक्का मकान, दो बग़ीचे, कई हज़ार के गहने और बीस हज़ार नकद।...
राजीव सिन्हा
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पठन समय: 12 मिनट (1) लाजवंती के यहाँ कई पुत्र पैदा हुए; मगर सब-के-सब बचपन ही में मर गए. आखिरी पुत्र हेमराज उसके जीवन का सहारा था. उसका मुंह देखकर वह पहले बच्चों की मौत का ग़म भूल जाती थी. यद्यपि हेमराज का रंग-रूप साधारण दिहाती बालकों का-सा ही था, मगर लाजवंती उसे सब...
 पोस्ट लेवल : कहानियाँ
राजीव सिन्हा
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मौसमे-बहार के फलों से घिरा बेहद नज़रफ़रेब गेस्टहाउस हरे-भरे टीले की चोटी पर दूर से नज़र आ जाता है। टीले के ऐन नीचे पहाड़ी झील है। एक बल खाती सड़क झील के किनारे-किनारे गेस्टहाउस के फाटक तक पहुँचती है। फाटक के नज़दीक वालरस की ऐसी मूँछोंवाला एक फ़ोटोग्राफ़र अपना साज़ो...
राजीव सिन्हा
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सुकिया के  हाथ की पथी कच्ची ईंटें पकने के  लिए भट्टे में लगाई जा रही थीं। भट्टे के गलियारे में झरोखेदार कच्ची ईंटों की दीवार देखकर सुकिया आत्मिक सुख से भर गया था। देखते-ही-देखते हजारों ईंटें भट्टे के गलियारे में समा गई थीं। ईंटों के बीच खाली जगह में पत्थर का कोयला,...