ब्लॉगसेतु

रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कहानी
यूसुफ  किरमानी
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तुम अभी याद नहीं आओगेजब मुश्किल तुम पर आई हैजब तुम्हारे जाने की बारी आई हैतुम अभी याद नहीं आओगेतुम तब याद आओगेजब हम मुश्किल में आ जाएंगेजब जीने के लाले पड़ जाएंगेजब सेठ को याद आएगा घर बनवानाजब पानी लीक करेगा नल पुरानाजब दीवारों पर सीलन आ जाएगीजब फर्नीचर बनवाने की ब...
Bharat Tiwari
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कर्फ्यू— चौ. मदन मोहन समरआम जनता सिस्टम की उन नाकामियों को जिनका कारण राजनीति आदि होती हैं और जिनसे पैदा होने वाली समस्याओं से निपटारा पाना पुलिस की जिम्मेदारी हो जाता है, उसके लिए पुलिस को कटघरे में खड़ा करती है. मेरा ख़ुद का सबसे जिगरी दोस्त दिल्ली पुलिस में है, जि...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कहानी
यूसुफ  किरमानी
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लॉकडाउन अब उसे क़ैद जैसा लगने लगा था।कोई कितना मोबाइल इस्तेमाल करे। वो अब किसी ऐसे से बात करना चाहता था, जिससे वो अपने दिल की बात कर सके। सोशल मीडिया का कोना कोना ढूँढा, कोई नहीं मिला। एक था, मगर पिछले कुछ महीनों से चल रहीकम्यूनल हवा के ज़हर से...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कहानी
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कहानी
Bharat Tiwari
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दंगा भेजियो मौला— अनिल यादव हिंदी कहानीकोरोना की तालाबंदी में क़ैद पाठक को अनिल यादव की हिंदी कहानी 'दंगा भेजियो मौला' उनमें से एक सिरा पकड़ा सकती है जो उसे अपनी वर्तमान लाचार और बेबस हालत के होने का कारण दिखा सकता है और बता सकती है कि उस कारण में उसका क्या...
यूसुफ  किरमानी
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मोबाइल लॉक करते ही स्क्रीन पर अंधेरा छा गया। डिजिटल दुनिया क़ैद हो चुकी थी। उसकी आँखों के सामने स्क्रीन पर बाहर दुनिया की परछाईं किसी फ़िल्म सीन जैसी लगी। वह लेटी लेटी अपने बिस्तर से उठी, विंडो से बाहर देखा। बाहर के आज़ाद नज़ारों को देखकर उसकी नज़रें ललचा रही थीं।...
यूसुफ  किरमानी
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टीवी पर वो न्यूज देख रहा था। 21 दिन के लॉकडाउन ने उस पर ख़ासा असर नहीं किया। आँखों में कोई अचंभा  नहीं। दिल की धड़कनों में कोई बदलाव नहीं। दूर दूर तक कोई हड़बड़ी भी नहीं। बस, वो हल्का सा हिला, सोफ़े पर खुद को एडजस्ट करने के लिए...देश के उस हिस्से में रह रहे लो...