ब्लॉगसेतु

रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कहानी
Kavita Rawat
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हम तो ठहरे हिन्दी माध्यम से पढ़े-लिखे, इसलिए हिंदी में ही पढ़ते-लिखते हैं। अंग्रेजी तो अपनी बस काम चलताऊ है, थोड़ा-बहुत समझ आ जाता है। अपने लिए तो  इतना  ही काफी है।  लेकिन अब मेरे आठवीं कक्षा में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वाले बेटे को भी गीत-संगीत, चित्र...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कविता कहानी
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कहानी
Bharat Tiwari
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योगिता यादव की लेखनी को मैं सदैव कहानी की विषयवस्तु को बिलकुल ताज़ा लिखने वाली मानता हूँ ,'नई देह में नए देस में' उन्होंने मेरी यह धारणा और मजबूत की हैं, उन्हें बधाई देता हूँ.भरत एस तिवारी "दो औरतें जब आपस में मिलना चाहती हों तो उन्‍हें मिलने देना चाहिए। किसी को भी...
ज्योति  देहलीवाल
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आठ साल का विशाल चाय की टपरी पर काम करता था। दो साल का था तब ही पिता की ज़हरीली शराब पीने से मौत हो गई थी। माँ दूसरे के घरों मे बर्तन और झाड़ू-पोंछा करके किसी तरह घर चला रही थी। घर में उसकी दादी और छोटी बहन मिला कर कुल चार सदस्य थे। उसकी माँ की कमाई इतनी नहीं हो पात...
अर्चना चावजी
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मुझे उसका नाम याद नहीं आ रहा पर उसकी याद बहुत आ रही है ........जब शादी होकर गई तो वो दौड़कर घर की चाबी लेकर आया था कोई 14-15 साल का लड़का था ...लालमाटिया कोयला केम्प में चार बजे पत्थर कोयले की सिगड़ी जलने रखता और आधे घंटे बाद लाईन से एक-एक के घर में पहुंचाता ......एक...
 पोस्ट लेवल : लिखी जा रही कहानी
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कहानी ललित निबंध
kavita verma
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कलमकार मंच द्वारा प्रकाशित मेरे कहानी संग्रह कछु अकथ कहानी के बारे में यहाँ पढिये और अच्छा लगे तो आर्डर भी यहीं कर दीजिए ।#booksfortrade#books#BookReviewhttps://kalamkarmanch.in/archives/1250
Saransh Sagar
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एक बुढ़िया बड़ी सी गठरी लिए चली जा रही थी। चलते-चलते वह थक गई थी। तभी उसने देखा कि एक घुड़सवार चला आ रहा है।उसे देख बुढ़िया ने आवाज दी, ‘अरे बेटा, एक बात तो सुन।’ घुड़सवार रुक गया। उसने पूछा, ‘क्या बात है माई...?’बुढ़िया ने कहा, ‘बेटा, मुझे उस सामने वाले गांव में ज...