ब्लॉगसेतु

rahul dev
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प्रीत वाली पायल बजी          मिट्टी से लिसड़ा प्रेम का नन्हा अंकुर, पहली दो पत्तियां निकली. एकदम तनी पत्तियां. पौधा बन फलने फूलने को उतावली. एकदम चटक हरियाली ने समूचा कोना ढक लिया. मेरे भीतर स्मृति की अंधेरी नदी में अनगिनत दिये थरथरा उठे. वह...
 पोस्ट लेवल : कहानी
ज्योति  देहलीवाल
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जैसे ही शिल्पा का एमबीए का आखरी पेपर हुआ, दूसरे ही दिन लड़केवाले उसे देखने आने वाले थे। उसके मामाजी ने यह रिश्ता बताया था। उन्होंने बताया था कि परिवार में सभी का स्वभाव बहुत ही अच्छा है, सभी लोग पढ़े-लिखे है, लड़का (प्रवीण) डॉक्टर है एवं लड़के में कोई ऐब नहीं है और सबस...
 पोस्ट लेवल : कहानी शर्म साहित्य
Saransh Sagar
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Add captionमहानगर के उस अंतिम बसस्टॉप पर जैसे ही कंडक्टर ने बस रोक दरवाज़ा खोला, नीचे खड़े एक देहाती बुज़ुुर्ग ने चढ़ने के लिए हाथ बढ़ाया। एक ही हाथ से सहारा ले डगमगाते क़दमों से वे बस में चढ़े, क्योंकि दूसरे हाथ में थी भगवान गणेश की एक अत्यंत मनोहर बालमूर्ति थी।गांव...
Manisha Sharma
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हिंदी कहानी - समस्या का समाधानअतिथि ब्लॉग पोस्ट यह कहानी एक गुरु जी और उनके शिष्य की जोड़ी की है। यह साधु महात्मा एक शहर से दूसरे शहर घुमा करते थे। और गुरु जी जो थे वह बहुत सारे लोगों के कष्टों का निवारण करते थे। अब शिष्य जो था उनके साथ उनकी सेवा करत...
Roli Dixit
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 स्पर्शअँधेरों में एक काली छाया उभरी. विरह ने आगे बढ़कर उसे होठों से लगाना चाहा. कोने में पड़ी सिगरेट सुलग उठी और देखते ही देखते विरह के होठों से जा लगी. एक अरसे से निस्तेज पड़ी राखदानी को आज स्पर्श मिला.क्रोनोलॉजीपहाड़ बूंदों के इंतज़ार में तब तक अपने आँसू अंदर दब...
 पोस्ट लेवल : कहानी लघुकथा प्रेम
ज्योति  देहलीवाल
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भैया का फोन आया, ''दिपाली, पापा की तबियत बहुत ख़राब है...डॉक्टर ने जबाब दे दिया है...तू जल्दी से आजा...'' आननफानन में तत्काल में रिजर्वेशन करवाकर मायके पहूंची। ऑटो से उतर कर जैसे ही घर में गई भाभी ने कहा, ''दीदी, आप पहले पापाजी को पानी पिलाओ। कल रात से उन्होंने एक घ...
Saransh Sagar
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Motivational Story In Hindiसंन्यास लेने के बाद गौतमबुद्ध ने अनेक क्षेत्रों की यात्रा की। एक बार वे एक गांव गए। वहां एक स्त्री उनके पास आई और बोली आप तो कोई राजकुमार लगते हैं। क्या मैं जान सकती हूँ कि इस युवावस्था में गेरुआ वस्त्र पहनने का क्या कारण है ? बुद्ध ने वि...
rahul dev
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परावर्तन - सुषमा मुनीन्द्र कहानी कुछ ऐसी थी - जज ने चोर को सजा सुनाई। चोर ने जज से कहा - साहब सजा मुझे नहीं मेरी माँ को दो ।  माँ ने बचपन में मुझे चोरी करने से रोका होता तो मैं चोर न बनता ----- प्रेरक को यह कहानी सुजान ने सुनाई और सुमुख ने सुनाई। प्रेरक छोटा थ...
 पोस्ट लेवल : कहानी
ज्योति  देहलीवाल
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जैसे ही शिल्पा ने घर में कदम रखा, बेटे और बहु ने उसे अजीब नज़रों से देखा। जैसे वो कोई गलत काम करके लौटी हो! उनकी नज़रों को नज़रअंदाज़ करके हॉल के सोफे पर बैठ कर वो मैगज़ीन के पन्ने पलटने लगी। उसे ऐसा करते देख उसके बेटे मनीष का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने तम...
Saransh Sagar
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 आपने जलेबी तो बहुत खायी होगी पर जलेबी खाने के बाद जलेबी वाले की डांट शायद कभी न खायी हो ! हुआ कुछ ये कि ३० अगस्त २०२० को मै शाम के वक्त ऑफिस से घर जा रहा था ! घर जाने के दौरान जलेबी खाने का मन नही था पर कोरोना के चलते काफी लोगो के रोजगार को जो धक्का पहुंचा था...