ब्लॉगसेतु

rahul dev
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आकाश में विमान अब नीचे आ रहा था, मिलिन्द ने खिड़की से नीचे झाँका, टोक्यो शहर पर उगते सूरज की सुनहरी धूप फैल रही थी। उन्हें यहाँ सेयह दृश्य, ऐसा लगा जैसे किसी कुशल चित्रकार ने कोई अनुपम कलाकृति बनाई हो। एयरपोर्ट परअब विमान उतरने को ही था, कि तभी एक उदघोषणा हुई कि भा...
 पोस्ट लेवल : कहानी अजय नावरिया
अरविन्दनाभ शुक्ल
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कभी रेशम का कीड़ा देखा है? देखा है तो बहुत बढ़िया, मेरी बात समझने में आसानी होगी| अगर नहीं देखा, तो भी कोई बात नहीं; बात का मर्म पहचानने में फिर भी कोई दिक्कत न होगी|जीवन का यथार्थ समयावधि के विस्तार में नहीं होता, जैसा कि बहुत से लोग सोचते हैं| जीवन-शास्त्र का सार त...
राकेश  श्रीवास्तव
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#corner-to-corner { height:100%; border:5px SOLID Green ; padding:30px; background: #F8ECC2 ; आत्मीयता मेरे एक परम मित्र अशोक जी का तबादला मेरे शहर में हो गया। एक दिन मैं सपरिवार बिना उनको सूचना दिए, उनका कुशलक्षेम पूछने उनके निवास स्थान पर पहुँचा। अभी हमल...
 पोस्ट लेवल : कहानी लघु-कथा
Bharat Tiwari
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समाज सेवा से जुड़ीं  कवियित्री रेणु हुसैन पेशे से सरकारी स्कूल नेताजी नगर सर्वोदय विद्यालय में अंग्रेजी की शिक्षिका हैं । रेणु हुसैन के दो कविता संग्रह “पानी प्यार” एवं “जैसे” और एक कहानी संग्रह “गुण्टी”  प्रकाशित हैं ।उनके आगामी काव्य संग्रह का नाम ‘...
jaikrishnarai tushar
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 चित्र -साभार गूगल एक ग़ज़ल -लिखने वाला अपने मन की प्रेम कहानी लिखता हैकोई राँझा-हीर तो कोई राधा रानी लिखता हैलिखने वाला अपने मन की प्रेम कहानी लिखता हैमीरा को भी सबने देखा अपनी-अपनी नज़रों सेकोई कहता जोगन कोई प्रेम दीवानी लिखता हैसब अपनी तकरीर में केवल बात...
sahitya shilpi
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पीली रोशनी का समंदर [कहानी]-विपिन पवार  लाल, पीला, दोहरा पीला, हरा – सिगनलों के यही रंग तो उसे साथ देते हैं रात के घने अंधियारे में । जब नामदेव अकेला चमड़े की बड़ी-सी थैली में 10 पटाखों से भरा एक डिब्‍बा, एक हाथ सिगनल बत्‍ती, टार्च, माचिस रखकर, कमीज की ऊपरी जे...
अनंत विजय
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इक्कीसवीं सदी का दूसरा दशक समाप्त हो गया और अब हम तीसरे दशक में प्रवेश कर चुके हैं। रचनात्मक लेखन में भी इन दो दशकों में कई बदलाव देखने को मिले। कुछ लेखकों ने अपनी कहानियों में या उपन्यासों में नए प्रयोग किए, भाषा के स्तर पर भी और कथ्य के स्तर पर भी। बावजूद इसके हि...
sahitya shilpi
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उसकी बीवी पहले गुस्ल करती थी .....और ये बात उसको हमेशा ही अजीब लगी थी कि एक औरत इस नियत से गुस्ल करे.....बीवी के बाल लंबे थे जो कमर तक आते थे। गुस्ल के बाद उन्हें खुला रखती। बिस्तर पर आती तो तकिये पर सर टिकाकर बालों को फर्श तक लटका देती। पानी बूंद बूंद कर टपकता और...
 पोस्ट लेवल : कहानी शमोएल अहमद
ज्योति  देहलीवाल
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"दादी माँ, दादी माँ...मैं भी आपके साथ चलता हूं सब्जी खरीदने।" दस साल के अनिल ने कहा। "नहीं बेटा, बाहर कोरोना है!" "अब तो सब अनलॉक हो रहा है। देखों न रास्ते पर भी कितनी भीड़ है। प्लीज़ मुझे ले चलो न। कितने महीने हो गए मुझे आपके साथ बाजार गए। मैं मास्क लगाकर...
sahitya shilpi
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