ब्लॉगसेतु

वंदना अवस्थी दुबे
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( मेरे कुछ वरिष्ठ जनों के आग्रह और आदेश पर मैं अपनी इस कहानी का पुनर्प्रकाशन कर रही हूं. मेरे जिन साथियों ने इसे पूर्व में पढा है, उनसे क्षमा याचना सहित)"अन्नू..... उठ जाओ, छह बज गए हैं।"मम्मी की आवाज़ के साथ ही मेरी आँखें खुल गई थीं। क्या मुसीबत है! ऐसे कडाके की...
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वंदना अवस्थी दुबे
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"ये क्या है मौली दीदी?"" आई-पॉड है.""ये क्या होता है?"" अरे!!!! आई-पॉड नहीं जानते? बुद्धू हो क्या?"इतना सा मुंह निकल आया आदि का. क्या सच्ची बुद्धू है आदि ? क्लास में तो अच्छे नंबर पाता है.....हाँ, कुछ चीज़ों के उसने नाम सुने हैं, लेकिन देखा नहीं है. "अरे पागल,...
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निर्मला कपिला
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सुखदा-----कहानी भाग --4 बेशक माँ के कपडों से बू आ रही थी मगर आज सुखदा को वह भी भली लग रही थी। आखिर खून अपनी महक दे रहा था। उसे अभी भी याद है जिस दिन वो शारदा देवी के साथ जा रही थी माँ कितना रोई थी,तडपी थी उसे किस तरह जोर से सीने से लगाया था मगर पिता ने एक झटके से छ...
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निर्मला कपिला
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सुखदा    कहानी-- भाग ------ 3पिछले भाग मे आपने पढा कि कैसे सुखदाके पिता के बीमार होने पर उसे एक ओझा के पास ले गये उस ओझा ने सुखदा को घर के लिये मनहूस बताया और एक आश्रम का पता दिया कि इसे वहाँ छोड दें। मगर उसकी माँ नही मानी और उसे नानी के घर भेज दिया। जहाँ...
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निर्मला कपिला
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 पिछले भाग मे आपने पढा कि सुखद के पिता को इलाज के लिये एक ओझा के पास ले जाया गया। कहा जाता था कि वि ओझा बिना चीर फाड किये कैंसर के मरीज का आप्रेशन करता था। वहाँ उस ओझा ने कहा कि सुखदा उनके घर का काल बन कर आयी है इस लिये इसे घर से दूर किसी आश्रम मे भेज दें। ये...
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निर्मला कपिला
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इस कहानी मे कुछ घटनायें सत्य हैं मगर पात्र आदि बदल दिये गये है। ओझा वाली घटना एक पढे लिखे और मेडिकल प्रोफेशन मे काम करने वाले आदमी के साथ घट चुकी है। मगर उसने जिस मरीज का ईलाज करवाया था वो 3-4 माह बाद ही मर गया था। उस बाबा का जम्मू मे आज भी लाखों का कारोबार है। उसक...
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निर्मला कपिला
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सच्ची साधना{आखिरी किश्त } pपिछली किश्तों मे आपने पढा कि शिव दास कैसे साधू बना और उसे फिर भी सँतुष्टी नही मिली तो वापिस अपने गाँव लौटा। जहाँ उसे राम किशन { अपने बचपन के दोस्त} का जीवन और लोक सेवा देख कर उसे कैसे बोध हुया कि सच्ची साधना वो नही जो वो कर रहा था सच्ची स...
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निर्मला कपिला
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सच्ची साधनाकल आपने पढा कि शिवदास अपनी जिम्मेदारियों से भाग कर साधु बन गया और 20-25 साल बाद वो साधु के वेश मे अपने गाँव लौटता है। उसका मन साधु के रूप मे भी अब नही लगता था।  eएक दिन उसका मन बहुत उदास हुया तो उसे अपने घर की याद आयी।वो अपने गाँव लौटता है और अपने द...
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निर्मला कपिला
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सच्ची साधना--- कहानीकल आपने पढा कि शिवदास अपनी जिम्मेदारियों से भाग कर साधु बन गया और 20-25 साल बाद वो साधु के वेश मे अपने गाँव लौटता है। उसका मन साधु के रूप मे भी अब नही लगता था।  आगे पढिये\---------शिवदास मेहनती नही था । बी.ए. करने के बाद उसने कई जगह हाथ पाँ...
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वंदना अवस्थी दुबे
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सामने वाले घर में सामान उतरता देख अचानक ही सोया पड़ा मोहल्ला जाग सा गया. चहल-पहल बढ़ गई. हर घर के दरवाज़े से एक अदद सिर थोड़ी-थोड़ी देर में बाहर निकलता, सामने वाले घर कि टोह लेता और फिर अन्दर हो जाता. दोपहर तक सारा सामान उतर चुका था और सामने वाले घर के दरवाज़े भी...
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