ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
26
उसकी ख़ामोशी खँगालती है उसे, वो वह  नहीं है जो वह थी, उसी रात ठंडी पड़ चुकी थी देह उसकी, हुआ था उसी रात उसका एक नया जन्म, एक पल ठहर गयीं थीं साँसें उसकीं,   खुला आसमां हवा में साँसों पर प्रहार, देख चुकी थी अवाक-सी वह,&nbsp...
jaikrishnarai tushar
131
चित्र -साभार गूगल एक गीत -कहीं देखा गाछ पर गाती अबाबीलें ढूँढता है मन हरापन सूखतीं झीलें |कटे छायादार तरु अब  ठूँठ ही जी लें |धूप में झुलसे हुएचेहरे प्रसूनों के ,घर -पते बदले हुए हैं मानसूनों के ,कहीं देखा गाछ...
Harash Mahajan
32
फिल्मी जगत की कुछ कही अनकही बातें ।***********************************इस सीरीज में हम बात करेंगे फिल्मी जगत में घटी कुछ ऐसी घटनाओं की जिनकी जानकारी सिर्फ कुछ विरले ही लोगों के पास होगी । औऱ जहां तक उन हस्तियों की बात है जिनके बारे में घटनाओं का ज़िक्र है संभवत: वही...
 पोस्ट लेवल : अनकही
PRABHAT KUMAR
156
एक दिन वह भी थाजब उसने सपना देखना शुरू किया थाएक दिन वह भी हैजब उसके अरमानों का कत्ल हुआसपने देखने से पहले उसके पास कुछ नहीं थाकेवल उम्मीद, आशा और उससे जलती मशाल के सिवाकेवल हंसी, खुशी और उससे पनपता प्यार के सिवालेकिन जब अरमानों का कत्ल हुआयानी दीपक बुझ गया, वह शून...
 पोस्ट लेवल : कविता कहीं ऐसा न हो
डॉ.अमित कुमार नेमा
500
" चंद लमहे सुकून से, गुज़ार लूं तो चलूँ ऐ मुहब्बत तुझे दिल से, पुकार लूं तो चलूँ "अवध की संस्कृति को अपने साहित्यसृजन का केन्द्रीय विषय बनाने वाले "डॉ.योगेश प्रवीन" का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है.डॉ.साहब की एक पुस्तक है "आपका लखनऊ" इसके नामकरण का राज उन्हीं के...
डॉ.अमित कुमार नेमा
500
रंगों के त्यौहार पर कुछ रंगीन होना ही चहिये तो यह हरा-भरा रेडियो ( Tivdio Radio HR 11S )खरीदा है. कुछ छोटी-मोटी बातें इस छोटू-मोटू के बारे में :-1. यह तीन बैंड ( MW,SW(1-12)और FM) वर्ल्ड रिसीवर रेडियो है, तीनों बैंड की फ्रीक्वेंसी रेंज इस प्रकार है - *MW - 522...
 पोस्ट लेवल : देखी-सुनी करी-कही
PRABHAT KUMAR
156
..................................................अपने जमाने का कोई अगर पी-एच. डी. कर रहा है तो वो ये महाशय। एक बात और बारीकी का है वो यह कि डीयू से पी-एच. डी. । जब मिले थे वह साल था 2008 का, अपने होस्टल में होस्टल एंथम सुनाए जाने का। हमने रैगिंग तो दिया था, लेकिन...
Ravindra Pandey
480
मुस्कुराता हुआ चेहरा देखकर,यकीं है सवेरा हुआ हो कहीं...क्या होती है रातें, न जानू सजन,रोशनी तेरे यादों की छटती नहीं...डगर हो, सफ़र हो, मंजिल तुम्हीं,बिन तुम्हारे घड़ी एक कटती नहीं..खुला आसमां और हम तुम वहाँ,नेमत क्यूँ ऐसी बरसती नहीं..?करो फैसला मेरे हक में 'रवीन्द्र'...
डॉ.अमित कुमार नेमा
500
बुंदेली बोली में कहासुनी, तकरार को "किरकिच" कहा जाता है. छायाचित्र में यह जो लाल-नारंगी-पीले फूलों वाली वनस्पति आप देख रहे हैं उसे ही हमारे यहाँ "किरकिचयाऊ" कहते हैं यानि "झगड़ा कराने वाली". कहा जाता है कि इसे जिस घर में डाल दिया जाये उस घर में विवाद हो जाता है.यह क...
 पोस्ट लेवल : देखी-सुनी करी-कही
Shachinder Arya
150
वह एक खाली-सी ढलती दोपहर थी। दिमाग बेचैन होने से बिलकुल बचा हुआ।किताबें लगीं जैसे बिखरी हुई हों जैसे. कोई उन्हें छूने वाला नहीं था. कभी ऐसा भी होता, हम अकेले रह जाते हैं।किताबों के साथ कैसा अकेलापन. उनकी सीलन भरी गंध मेरी नाकों के दोनों छेदों से गुज़रती हुई पता नहीं...