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sanjiv verma salil
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पुरोवाक''कागज़ के अरमान'' - जमीन पर पैर  जमकर आसमान में उड़ान आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*               मानव सभ्यता और कविता का साथ चोली-दामन का सा है। चेतना के विकास के साथ मनुष्य ने अन्य जीवों की तुलना में प्रकृ...
sanjiv verma salil
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कागज़ के अरमानکاگز کے ارمان Kagaz ke armaan, a collection of poems and paintingsBy NEERAVगुरुवर श्री मुकुल शर्मा जी के पुनीत करकमलों में सादर समर्पित***पुरोवाक''कागज़ के अरमान'' - जमीन पर पैर  जमकर आसमान में उड़ान आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल...
sanjiv verma salil
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हाइकु सलिला *कल आएगा? सोचना गलत हैजो करो आज। *लिखो हाइकु कागज़-कलम लेहर पल ही। *जिया में जियाहर पल हाइकु जिया ने रचा। *चाह कलम मन का कागज़ भाव हाइकु। *शब्द अनंत पढ़ो-सुनो, बटोरो मित्र बनाओ। *शब्द संपदाअनमोल मोती हैं सदा सहेजो। *श्वास नदिया आस नद-प्रवाह प्रयास नौक...
मुकेश कुमार
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बीडी पटाखे के लड़ियों कीकुछ क्षण की चिंगारी जैसातुम्हारा प्यारफिस्स्स्सस !!इस्स्स्ससकी हल्की छिटकती ध्वनिजैसे कहा गया हो - लव यूजिसकी प्रतिध्वनि के रूप मेंछिटक कर बनायी गयी दूरीजैसे होने वाली हो आवाज वफैलने वाली हो आगऔर उसके बाद का डर- 'लोग क्या कहेंगे'शुरूआती आवाज...
मधुलिका पटेल
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कल जब परदेस मेंतनहा बैठा था मैं मेरे देश के चाँद ने हौले से कहा वापस आजा ओ परदेसी तेरे देश में भी मैं चमक रहा उन सिक्को की आबोताब में मत खो जा तेरे अपने बड़े बेसब्री से राह तक रहे हैं जा उनका रुखसार चमका बेजान कागजों के ढ...
sanjiv verma salil
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पुस्तक सलिला-नवगीतों के घाट पर कागज़ की नाव  आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*[कृति विवरण: कागज़ की नाव, नवगीत संग्रह, राजेंद्र वर्मा, वर्ष २०१५, आकार डिमाई, आवरण सजिल्द, जैकेट सहित, बहुरंगी, पृष्ठ ८०, मूल्य १५० रु., उत्तरायण प्रकाशन, के ३९७ आशियाना कॉलोनी, लखनऊ २२६०१२...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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कागज़का टुकडा नहीं हूँलिखा और फाड़ दिया जज़्बातों से भरा हूँ धडकते दिल का मालिक हूँनिरंतरमोहब्बत को तरसता हूँमोहब्बत में जीता हूँजिसका हो गया एक बारउसी का रहता हूँपुचकारे ये दुत्कारेशौक से सहता हूँ© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर543-06-26-11-2014मोहब्बत,ज़ज़्बात,शायरी,कागज़,boo...