ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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कविवर विष्णु नागर जी के शब्दों में-'पत्नी से बड़ा कोई आलोचक नहीं होताउसके आगे नामवर सिंह तो क्यारामचंद्र शुक्ल भी पानी भरते हैंअब ये इनका सौभाग्य हैकि पत्नियों के ग्रंथ मौखिक होते हैं, कहीं छपते नहीं 'वहीं दूसरी ओर वे जीवन को कविता कहते हैं- 'जीवन भी कविता बन...
विजय राजबली माथुर
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' ब्रह्मसूत्रेण पवित्रीकृतकायाम् ' यह लिखा है कादम्बरी में सातवीं शताब्दी में आचार्य बाणभट्ट ने। अर्थात  महाश्वेता ने जनेऊ पहन रखा है, तब तक लड़कियों का भी उपनयन होता था। (अब तो सबका उपहास अवैज्ञानिक कह कर उड़ाया जाता है)। श्रावणी पूर्णिमा अर्थात रक्षा - बंधन...
विजय राजबली माथुर
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' ब्रह्मसूत्रेण पवित्रीकृतकायाम् ' यह लिखा है कादम्बरी में सातवीं शताब्दी में आचार्य बाणभट्ट ने.अर्थात  महाश्वेता ने जनेऊ पहन रखा है, तब तक लड़कियों का भी उपनयन होता था.(अब तो सबका उपहास अवैज्ञानिक कह कर उड़ाया जाता है).श्रावणी पूर्णिमा अर्थात रक्षा बंधन पर...