ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
0
दोहा मुकतक बीत गईँ कितनी ऋतुएँ, बीते कितने सालकोयल तजे न कूकना, हिरन न बदले चालपर्व बसंती हो गया, वैलेंटाइन आजप्रेम फूल सा झट झरे, सात जन्म कंगाल*निशि दिन छटा बसंत की, देखें तन्मय मौन। आभा अंजलि में लिए, सजा रहा जग कौन।।सॉनेट   बसंत*पत्ता पत्ता...
sanjiv verma salil
0
कार्यशालादोहा से कुंडलियासंजीव वर्मा 'सलिल', *पुष्पाता परिमल लुटा, सुमन सु मन बेनाम।प्रभु पग पर चढ़ धन्य हो, कण्ठ वरे निष्काम।।चढ़े सुंदरी शीश पर, कहे न कर अभिमान।हृदय भंग मत कर प्रिये!, ले-दे दिल का दान।।नयन नयन से लड़े, झुके मिल मुस्काता।प्रणयी पल पल लुटा, प...
sanjiv verma salil
0
कार्यशाला छंद बहर दोउ एक है - ९ रगण यगण गुरु = २१२ १२२ २ सात वार्णिक उष्णिक जातीय, बारह मात्रिक आदित्य जातीय छंद बहर- फाइलुं मुफाईलुं*मुक्तक मेघ ने लुभाया है मोर नाच-गाया है जो सगा नहीं भाया वह गया भुलाया है *मौन मौन होता है शोर शोर बोटा है साफ़-साफ़ बोले जो जार-जार...
 पोस्ट लेवल : कार्यशाला
sanjiv verma salil
0
कार्यशाला-एक मुक्तक*तुम एक सुरीला मधुर गीत, मैं अनगढ़ लोकगीत सा हूँ तुम कुशल कलात्मक अभिव्यंजन, मैं अटपट बातचीत सा हूँ - फौजीतुम वादों को जुमला कहतीं, मैं जी भर उन्हें निभाता हूँतुम नेताओं सी अदामयी, मैं निश्छल बाल मीत सा हूँ . - सलिल ****२-१२-२०१६ http://divya...
sanjiv verma salil
0
कार्यशाला- दोहा / रोला/ कुण्डलिया मन का डूबा डूबता , बोझ अचिन्त्य विचार ।चिन्तन का श्रृंगार ही , देता इसे उबार ॥ -शंकर ठाकुर चन्द्रविन्दु देता इसे उबार, राग-वैराग साथ मिल। तन सलिला में कमल, मनस का जब जाता खिल।। चंद्रबिंदु शिव भाल, सोहता सलिल-धार बन।...
sanjiv verma salil
0
कार्यशाला :सिगरेट संजीव *ज़िंदगी सिगरेट सी जलती रही ऐश ट्रे में उमीदों की राख है। * दिलजले ने दाह दी हर आहजला कर सिगरेट, पाया चैन कुछ।  *राह उसकी रात तक देखा किया थाम कर सिगरेट, बेबस मौन दिल।...
 पोस्ट लेवल : कार्यशाला सिगरेट
sanjiv verma salil
0
हर पल हिंदी को जिएँ, दिवस न केवल एक।मानस मैया मानकर, पूजें सहित विवेक।।कार्यशाला षट्पदी (कुण्डलिया )*आओ! सब मिलकर रचें, ऐसा सुंदर चित्र। हिंदी पर अभिमान हो, स्वाभिमान हो मित्र।। -विशम्भर शुक्ल स्वाभिमान हो मित्र, न टकरायें आपस में। फूट पड़े तो शत्रु, जयी हो रहे न बस...
sanjiv verma salil
0
कार्यशाला:डॉ. शिवानी सिंह के दोहे *गागर मे सागर भरें भरें नयन मे नीर|पिया गए परदेश तो कासे कह दे पीर||तो अनावश्यक, प्रिय के जाने के बाद प्रिया पीर कहना चाहेगी या मन में छिपाना? प्रेम की विरह भावना को गुप्त रखना जाना करुणा को जन्म देता है..गागर मे सागर भरें, भरें नय...
sanjiv verma salil
0
कार्यशालादोहा से कुंडलिया*पोर पोर में है थकन, दर्द दर्द मे तानमन को धक्का मारते, सपने कुछ शैतान।  -शशि पुरवारसपने कुछ शैतान, नटखटी बचपनवालेजरा बड़े हम हुए, पड़ गए उन पर ताले'सलिल' जी सकें काश!, होकर भाव विभोरखट्टी अमिया तोड़, खा नाचे हर पोर - संजीवhttp://divya...
sanjiv verma salil
0
कार्यशाला:बीनू भटनागरराहुल मोदी भिड़ रहे, बीच केजरीवाल,सत्ता के झगड़े यहाँ,दिल्ली बनी मिसाल।संजीवदिल्ली बनी मिसाल, अफसरी हठधर्मी कीहाय! सियासत भी मिसाल है बेशर्मी कीलोकतंत्र की कब्र, सभी ने मिलकर खोदीजनता जग दफना दे, कजरी राहुल मोदी***http://divyanarmada.blogspot.i...