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sanjiv verma salil
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कुण्डलियाकार्य शाला**कुंडलिया वादे कर जो भुला दे, वह खोता विश्वास.ऐसे नेता से नहीं, जनता को कुछ आस.जनता को कुछ आस, स्वार्थ ही वह साधेगा.भूल देश-हित दल का हित ही आराधेगा.सलिल कहे क्यों दल-हित को जनता पर लादे.वह खोता विश्वास भला दे जो कर वादे १९-१२-२०१७ तन की मनहर बा...
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कार्य शाला:दोहा से कुण्डलिया *बेटी जैसे धूप है, दिन भर करती बात।शाम ढले पी घर चले, ले कर कुछ सौगात।। -आभा सक्सेना 'दूनवी' लेकर कुछ सौगात, ढेर आशीष लुटाकर।बोल अनबोले हो, जो भी हो चूक भुलाकर।। रखना हरदम याद, न हो किंचित भी हेटी। जाकर भी जा सकी, न दिल से प्यारी बेटी।...
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छंद चर्चा:दोहा गोष्ठी:**सूर्य-कांता भोर आ, करती ध्यान अडोल।चंद्र-कांता साँझ सँग, हँस देती रस घोल।।*सूर्य-कांता गा रही, गौरैया सँग गीत।चंद्र-कांता के हुए, जगमग तारे मीत।।*सूर्य-कांता खिलखिला, हँसी सूर्य-मुख लाल।पवनपुत्र लग रहे हो, किसने मला गुलाल।।*चंद्र-कांता मुस्क...
 पोस्ट लेवल : कार्य शाला दोहा
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कार्य शाला:दोहा से कुण्डलिया*बेटी जैसे धूप है, दिन भर करती बात।शाम ढले पी घर चले, ले कर कुछ सौगात।। -आभा सक्सेना 'दूनवी'लेकर कुछ सौगात, ढेर आशीष लुटाकर।बोल अनबोले हो, जो भी हो चूक भुलाकर।।रखना हरदम याद, न हो किंचित भी हेटी।जाकर भी जा सकी, न दिल से प्यारी बेटी।। -सं...
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कार्य शालाछंद बहर दोउ एक हैंसंजीव*महासंस्कारी जातीय मात्रिक छंद (प्रकार २५८४)पंक्ति जातीय वार्णिक छंद (प्रकार १०२४)गण सूत्र - र र य गपदभार - २१२ २१२ १२२ २*दे भुला वायदा वही नेतादे भुला कायदा वही जेताजूझता जो रहा नहीं हाराहै रहा जीतता सदा चेतानाव पानी बिना नहीं...
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कार्य शाला- दोहा / रोला / कुण्डलिया *खिलना झड़ना बिखरना जीवन क्रम है खास। कविता ही कहती नहीं, कहते सब इतिहास।। -पं. गिरिमोहन गुरुकहता युग-इतिहास, न 'गुरु' होता हर कोई। वही काटता फसल, समय पर जिसने बोई।।'सलिल' करे 'संजीव', न आधे मन से मिलना।बनो नर्मदा ल...
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छंद कार्य शाला :राधिका छंद  लक्षण: २२ मात्रिक, द्विपदिक, समतुकांती छंद। विधान: यति १३-९, पदांत यगण १२२ , मगण २२२।  अभिनव प्रयोग गीत *क्यों मूल्य हुए निर्मूल्य, कौन बतलाए?क्यों अपने ही रह गए,न सगे; पराए।।  *तुलसी न उ...
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छंद कार्य शाला :राधिका छंद १३-९ लक्षण: २२ मात्रिक, द्विपदिक, समतुकांती छंद.विधान: यति १३-९, पदांत यगण १२२ , मगण २२२ उदाहरण:१. जिसने हिंदी को छोड़, लिखी अंग्रेजी उसने अपनी ही आन, गर्त में भेजी निज भाषा-भूषा की न, चाह क्यों पाली?क्यों दुग्ध छो...
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प्रदत्त शब्द :- आभूषण, गहनादिन :- बुधवारतारीख :- ११-०७-२०१८विधा :- दोहा छंद (१३-११)*आभूषण से बढ़ सकी, शोभा किसकी मीत?आभूषण की बढ़ा दे, शोभा सच्ची प्रीत.*'आ भूषण दूँ' टेर सुन, आई वह तत्काल.भूषण की कृति भेंट कर, बिगड़ा मेरा हाल.*गहना गह ना सकी तो, गहना करती रंज.सास-ननदि...
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नव लेखन कार्य शाला:दोहा सलिलासुनीता सिंह * पीड़ा मे क्यो डूबता, बैठ करे संताप।ले बीड़ा उपचार का, अपना रहबर आप।।.क्यों पीड़ा से हारकर, करे मनुज संताप?ले बीड़ा उपचार का, बन निज रहबर आप।। *देती कुदरत राह भी , निर्भय देख प्रयास।कातर नयना क्यो खड़ा, ढूँढ तमस मे आस।।.कुदरत...