ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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ॐ। अथ देव्या कवचं ।। यह देवी कवच है ।ॐ अस्य श्रीचण्डीकवचस्य ब्रह्मा ऋषि:, अनुष्टुप छंद: चामुंडा देवता,अंगन्यासोक्तमातरो बीजं, दिग्बंधदेवतास्तत्त्वं ,श्री जगदंबा प्रीत्यर्थे सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोग:।। ॐ यह श्री चंडी कवच है, ब्रह्मा ऋषि ने गाया है।। छंद अनुष...
sanjiv verma salil
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हिंदी काव्यानुवाद-तंत्रोक्त रात्रिसूक्त*II यह तंत्रोक्त रात्रिसूक्त है III ॐ ईश्वरी! धारक-पालक-नाशक जग की, मातु! नमन III हरि की अनुपम तेज स्वरूपा, शक्ति भगवती नींद नमन I१I*I ब्रम्हा बोले: 'स्वाहा-स्वधा, वषट्कार-स्वर भी हो तुम III तुम्हीं स्वधा-अक्षर-नित्या हो, त्रि...
sanjiv verma salil
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समीक्षा अमरेन्द्र नारायण शुभ आशीर्वाद, १०५५,रिज रोड, भूतपूर्व महासचिव एशिया पैसिफिक टेलीकौम्युनिटी साउथ सिविल लाइन्स ,जबलपुर ४...
sanjiv verma salil
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ॐ                     -: विश्व वाणी हिंदी संस्थान - समन्वय प्रकाशन अभियान जबलपुर :-                ll हिंदी आटा माढ़िए, उर्दू मोयन डाल l 'सलिल' संस्कृत सान...
 पोस्ट लेवल : भाषा काव्य और छंद २
राजीव सिन्हा
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पढ़ें सिर्फ: < 1 मिनट में भले डांट घर में तू बीबी की खानाभले जैसे -तैसे गिरस्ती चलानाभले जा के जंगल में धूनी रमानामगर मेरे बेटे कचहरी न जानाकचहरी न जानाकचहरी न जाना कचहरी हमारी तुम्हारी नहीं हैकहीं से कोई रिश्तेदारी नहीं हैअहलमद से भी कोरी यारी नहीं हैतिवारी...
 पोस्ट लेवल : काव्य संसार
sanjiv verma salil
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आलेख:गीति-काव्य में छंदों की उपयोगिता और प्रासंगिकताआचार्य ​संजीव​ वर्मा​ 'सलिल'*भूमिका: ध्वनि और भाषा​आध्यात्म, धर्म और विज्ञान तीनों सृष्टि की उत्पत्ति नाद अथवा ध्वनि से मानते हैं। सदियों पूर्व वैदिक ऋषियों ने ॐ से सृष्टि की उत्पत्ति बताई, अब विज्ञान नवीनतम खोज क...
anup sethi
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विष्णु खरे जी की यह बातचीत चिंतनदिशा के हाल के अंक में यानी 2019 अंत में छपी है। इसकी शुरुआती रिकॉर्डिंग 2012 में रमेश राजहंस के घर पर रात के खाने पर हुई। बातचीत करने के लिए पत्रिका से जुड़े हुए लेखक थे - हृदयेश मयंक, विनोद श्रीवास्तव, रमेश राजहंस, शैलेश सिंह। रिकॉ...
Roshan Jaswal
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इस शहर में घर ढूंढता है कोई,क्या यहां अपना रहता है कोई।उफ ये दौड़ , ये भागमभाग,चुपचाप सा बहता है कोई।बदहवास ज़िंदगी का सबब है क्या,अपना ही पता यहां पूछता है कोई। जारी.... 
 पोस्ट लेवल : काव्य
sanjiv verma salil
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संस्कृत - चमत्कारी भाषा*एकाक्षरी श्लोकमहाकवि माघ ने अपने महाकाव्य 'शिशुपाल वध' में एकाक्षरी श्लोक दिया है -दाददो दुद्ददुद्दादी दाददो दूददीददोः ।दुद्दादं दददे दुद्दे दादाददददोऽददः ॥ १४४अर्थ - वरदाता, दुष्टनाशक, शुद्धक, आततायियों के अंतक क्षेत्रों पर पीड़क शर का संधान...
sanjiv verma salil
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काव्य कानन अनुक्रम १. दोहा - सोरठा गीत     पानी की प्राचीर २. सोरठा - दोहा गीत    संबंधों की नाव।                                   &nb...
 पोस्ट लेवल : काव्य कानन kavya kanan