ब्लॉगसेतु

anup sethi
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नई पीढ़ी में ऐसे भी लोग हैं जो हिंदी साहित्‍य को प्रौद्योगिकी के सहयोग से व्‍यापक पाठक वर्ग तक ले जाना चाहते हैं। इन्‍हीं में से एक युवा फिल्‍मकार मनीष गुप्‍ता हैं जो हिन्‍दी कविता की छोटी-छोटी वीडियो फिल्‍मों की एक श्रृंखला यूट्यूब के लिए बना रहे हैं। अभी यह शुरुआ...
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सलमान मासाल्‍हा 4 नवंबर 1953 को मगहर के गांव गलीली में जन्‍मा हिब्रू और अरबी दोनों भाषाओं में लिखने वाला ड्रूज़ (अनेक दर्शनों के मिश्रण में यकीन करने वाले) कवि है। सन् 2006 में उसने जेरुसलम में एक ऐसा बहुलतावादी मादरे-वतन बनाने की घोषणा की, यहूदी, अरब और दूसरे सभी...
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   चित्रकृति: संजय राउतसमकालीन कविता पर जय प्रकाश का यह लेख कविता की अंतर्धारा को समझने में मदद करता है, वागर्थ के अप्रैल अंक से साभारबीसवीं सदी के अन्तिम दशकों में जो अभूतपूर्व साभ्यतिक परिवर्तन हुए, उनके चलते मानवीय संवेदना के क्षरण की प्रक्रिया मे...
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धीरोदात्त नायक की प्रतीक्षा करती और साथ ही उत्तेजक उत्तर-आधुनिकतावादी नारीवादी विमर्श करती पद्मिनी नायिका कथादेश में पवन करण और अनामिका की कविताओं पर जारी बहस में कात्‍यायनी का लेख. इस बहस में आप पहले प्रभु जोशी का लेख पढ़ चुके हैं.   रजा, &n...
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छायांकन - हरबीर यह लेख कुछ वर्ष पहले शिखर संस्‍था द्वारा हिमाचल की युवा रचनाशीलता पर आयोजित संगोष्‍ठी‍ में पढ़ा गया था. हाल में यह स्‍वाधीनता के शारदीय विशेषांक में छपा है. इस बीच आत्‍मारंजन का काव्‍यसंग्रह पगडंडियां गवाह हें भी आ गया है और अजेय के संग्रह की घोषणा...
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जैसा कि आप जानते हैं, मुंबई से प्रकाशित पत्रि‍का चिंतनदिशा में विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार की चिट्ठियों के जरिए समकालीन कविता पर बहस शुरू हुई थी. अगले अंकों में इन चिट्ठियों पर विजेंद्र और जीवन सिंह; राधेश्‍याम उपाध्‍याय, महेश पुनेठा, सुलतान अहमद...
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इधर हिंदी साहित्‍य जगत में बात-बात में बहसें क्‍या उठ खड़ी हो जा रही हैं, मानो पानी को उबाल कर गाढ़ा करने का खेल चल रहा हो. पत्रि‍काओं के चूल्‍हे पर जहां पतीलियों में पानी चढ़ाया जाता है, वहां इंटरनेट का पंखा आग को हवा देने की ड्यूटी संभाल लेता है. सब जानते हैं पान...
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तू लिक्‍खकागज को घोच मतअच्‍छी कविता लिक्‍ख
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चिंतनदिशा में समकालीन कविता पर विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार की चिट्ठियां आप पढ़ चुके हैं. फिर अगले अंक में उन चिट्ठियों पर विजेंद्र और जीवन सिंह की प्रतिक्रिया भी पढ़ चुके हैं. चिंतनदिशा के ताजा अंक में राधेश्‍याम उपाध्‍याय, महेश पुनेठा, सुलतान अहमद और मेरी प्रत...
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    चिंतनदिशा में समकालीन कविता पर विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार की चिट्ठियां आप पढ़ चुके हैं. फिर अगले अंक में उन चिट्ठियों पर विजेंद्र और जीवन सिंह की प्रतिक्रिया भी पढ़ चुके हैं. चिंतनदिशा के ताजा अंक में राधेश्‍याम उपाध्‍याय, महेश पुनेठा, सुलतान अ...