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Sanjay  Grover
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ग़ज़लअपनी तरह का जब भी उन्हें माफ़िया मिलाबोले उछलके देखो कैसा काफ़िया मिलाफ़िर नस्ल-वर्ण-दल्ले हैं इंसान पे काबिज़यूँ जंगली शहर में मुझे हाशिया मिलामुझतक कब उनके शहर में आती थी ढंग से डाकयां ख़बर तक न मिल सकी, वां डाकिया मिलाजब मेरे जामे-मय में मिलाया सभी ने ज़ह्रतो तू...
sanjiv verma salil
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पुस्तक चर्चा-'गज़ल रदीफ़,-काफ़िया और व्याकरण' अपनी मिसाल आप चर्चाकार- आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*पुस्तक विवरण- गज़ल रदीफ़,-काफ़िया और व्याकरण, डॉ. कृष्ण कुमार 'बेदिल', विधा- छंद शास्त्र, प्रथम संस्करण २०१५, आकार २२ से.मी. X १४.५ से.मी., आवरण सजिल्द बहुरंगी जैकेट सहित...