ब्लॉगसेतु

संतोष त्रिवेदी
144
पुस्तक मेले में घुसते ही ‘वो’ दिखाई दिए।मैं कन्नी काटकर निकलना चाहता था पर उन्होंने पन्नी में लिपटी अपनी किताब मुझे पकड़ा दी।फिर फुसफुसाते हुए बोले, ‘अब आए हो तो विमोचन करके ही जाओ।तुम मेरे आत्मीय हो।आपदा में अपने ही याद आते हैं।’ ऐसा कहते हुए वे मुझे साहित्य में उ...
सुशील बाकलीवाल
273
        इन दिनों वॉट्सएप पर एक मैसेज चलन में बना हुआ है जिसमें वर्षों बाद उन्नति के ऊंचे शिखर पर स्थापित एक छात्र अपने पूर्व प्रोफेसर से मिलने पर उसका धन्यवाद करते हुए कहता है कि सर आज मैंने जो कुछ भी हासिल किया है वो आपकी उस एक दिन की उदारता का...
सुशील बाकलीवाल
409
          एक भिखारी रोज एक दरवाजें पर जाता और भीख के लिए आवाज लगाता, जब घर मालिक बाहर आता तो उसे गालिया और ताने देता- मर जाओ, काम क्यूं नही करते, जीवन भर भीख मांगतें रहोगे, कभी-कभी गुस्सें में उसे धकेल भी देता, पर भिखारी...
Ashok Kumar
151
नॉटनल डॉट कॉम (notnul.com) एक तरह का नवोन्मेष है जहाँ इसके कर्ता-धर्ता नीलाभ श्रीवास्तव हिन्दी की महत्त्वपूर्ण पत्रिकाओं के साथ किताबें भी सॉफ्ट वर्ज़न में ला रहे हैं और बेहद कम दामों में युवा पीढ़ी को उनके मोबाइल्स और लैपटॉप पर हिन्दी का श्रेष्ठ साहित्य उपलब्ध करा र...
संजीव तिवारी
33
किताब पढ़ने के मामले में मन में पूर्वग्रह नहीं पालना चाहिए। मैंने बरसों नेहरु पर लिखी एम जे अकबर की किताब इसलिए नहीं पढ़ी क्योंकि मैं उनको कांग्रेस का नेता समझता रहा। बाद में पढ़ी तो समझ में आया कि कितनी अच्छी किताब थी। यही हाल दिनकर जी की किताब 'लोकदेव नेहरु' के स...
Ashok Kumar
151
सीरिया विश्व मानचित्र पर एक घाव सा है या बेहतर होगा यह कहना कि सीरिया मनुष्यता की देह पर एक घाव सा है. मराम अल-मासरी की कविताएँ उन घावों और खरोंचों को उनकी पूरी तल्खी के साथ अपनी कविताओं में ले आती हैं तो देवेश ने अपने अनुवादों से उन्हें हिन्दी के पाठक तक लाते हुए...
Ashok Kumar
151
युवा कथाकार अनघ शर्मा का पहला कहानी संकलन "धूप की मुंडेर" अभी हाल ही में राजकमल प्रकाशन से आया है. उसी संकलन से एक कहानी. “डाल दिया रे पानी पे बिछौना,किसने किया रे ये पानी पे बिछौनाससुर हमारे चौधरी,सास बड़ी तेताल,हाय- हाय- हाय दिन रात लड़े हैडाल दिया रे पानी पे...
Ashok Kumar
151
प्रेमलहरी मुग़ल शहज़ादी और एक कवि के प्रेम का आख्यान है. आप इसे असफल प्रेम का आख्यान भी कह सकते हैं लेकिन प्रेम तो अपने होने में ही सफल हो जाता है. एक स्पर्श में, एक चुम्बन में, एक भाव में... उसकी असफलता और सफलता के पैमाने किसी खेल की जीत-हार से कैसे हो सकते हैं? त्र...
sanjeev kumar mishra mishra
756
चुनाव के आखिरी चरण में सियासी लड़ाई अब दिल्ली क्लब-लुटियन क्लब से होते हुए खान मार्केट तक आ पहुंची है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आखिरी खान मार्केट गैंग कहने की जरुरत क्यों महसूस हुई? इसका जवाब भी उन्हीं के सवाल में छिपा है? जिसे जानने के लिए पहले दिल्ली क्...
Ashok Kumar
151
हाल ही में आई प्रभात रंजन की किताब "पालतू बोहेमियन" खूब चर्चा में है. प्रभात बहुधन्धी रचनाकार हैं. कहानियों से पहचान बनाई, फिर मार्केज़ पर एक शानदार किताब लिखी, मुजफ्फरपुर की 'कोठागोई' पर रोचक और श्रमसाध्य शोध किया और अब अपने गुरु 'मनोहर श्याम जोशी' का यह संस्मरण. व...