ब्लॉगसेतु

Ashok Kumar
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नॉटनल डॉट कॉम (notnul.com) एक तरह का नवोन्मेष है जहाँ इसके कर्ता-धर्ता नीलाभ श्रीवास्तव हिन्दी की महत्त्वपूर्ण पत्रिकाओं के साथ किताबें भी सॉफ्ट वर्ज़न में ला रहे हैं और बेहद कम दामों में युवा पीढ़ी को उनके मोबाइल्स और लैपटॉप पर हिन्दी का श्रेष्ठ साहित्य उपलब्ध करा र...
डा. सुशील कुमार जोशी
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एक भी नहीं छिपता है ना मुँह छिपाता है सामने से आकर गर्व के साथ खड़ा हो कर मुस्कुराता है मुखौटा लगाने की जरूरत भी नहीं समझता है पकड़ा गया होता है फिर भी नहीं घबराता है सफेद कागज के ऊपर इफरात से फैला हुआ काला बहुत कुछ कितनी कितनी कहानियाँ बना बना कर तालियाँ बटोरता हुआ...
संजीव तिवारी
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किताब पढ़ने के मामले में मन में पूर्वग्रह नहीं पालना चाहिए। मैंने बरसों नेहरु पर लिखी एम जे अकबर की किताब इसलिए नहीं पढ़ी क्योंकि मैं उनको कांग्रेस का नेता समझता रहा। बाद में पढ़ी तो समझ में आया कि कितनी अच्छी किताब थी। यही हाल दिनकर जी की किताब 'लोकदेव नेहरु' के स...
Ashok Kumar
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सीरिया विश्व मानचित्र पर एक घाव सा है या बेहतर होगा यह कहना कि सीरिया मनुष्यता की देह पर एक घाव सा है. मराम अल-मासरी की कविताएँ उन घावों और खरोंचों को उनकी पूरी तल्खी के साथ अपनी कविताओं में ले आती हैं तो देवेश ने अपने अनुवादों से उन्हें हिन्दी के पाठक तक लाते हुए...
Ashok Kumar
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युवा कथाकार अनघ शर्मा का पहला कहानी संकलन "धूप की मुंडेर" अभी हाल ही में राजकमल प्रकाशन से आया है. उसी संकलन से एक कहानी. “डाल दिया रे पानी पे बिछौना,किसने किया रे ये पानी पे बिछौनाससुर हमारे चौधरी,सास बड़ी तेताल,हाय- हाय- हाय दिन रात लड़े हैडाल दिया रे पानी पे...
Ashok Kumar
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प्रेमलहरी मुग़ल शहज़ादी और एक कवि के प्रेम का आख्यान है. आप इसे असफल प्रेम का आख्यान भी कह सकते हैं लेकिन प्रेम तो अपने होने में ही सफल हो जाता है. एक स्पर्श में, एक चुम्बन में, एक भाव में... उसकी असफलता और सफलता के पैमाने किसी खेल की जीत-हार से कैसे हो सकते हैं? त्र...
sanjeev kumar mishra mishra
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चुनाव के आखिरी चरण में सियासी लड़ाई अब दिल्ली क्लब-लुटियन क्लब से होते हुए खान मार्केट तक आ पहुंची है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आखिरी खान मार्केट गैंग कहने की जरुरत क्यों महसूस हुई? इसका जवाब भी उन्हीं के सवाल में छिपा है? जिसे जानने के लिए पहले दिल्ली क्...
Ashok Kumar
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हाल ही में आई प्रभात रंजन की किताब "पालतू बोहेमियन" खूब चर्चा में है. प्रभात बहुधन्धी रचनाकार हैं. कहानियों से पहचान बनाई, फिर मार्केज़ पर एक शानदार किताब लिखी, मुजफ्फरपुर की 'कोठागोई' पर रोचक और श्रमसाध्य शोध किया और अब अपने गुरु 'मनोहर श्याम जोशी' का यह संस्मरण. व...
Ashok Kumar
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वसंत सकरगाए जीवन जगत की बेहद साधारण वस्तुओं में असाधारणता रोप देने वाले कवि हैं. अपने अलमस्त और लगभग लापरवाह स्वभाव के विपरीत कविताओं में वह बेहद सावधान हैं, लेकिन यह चालाक नहीं मासूम सावधानी है एक क़स्बाई व्यक्ति की जिससे गुज़रते हुए आप थोड़ा और सहज हो जाते हैं. कभी...
 पोस्ट लेवल : नई किताब वसंत सकरगाए
Vikram Pratap Singh Sachan
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का है बे का उखाड़ लोगों, हियाँ टेम्पो हाई है टाइप की तमाम रंगबाज़ियाँ, और तमाम झाँय झाँय लिखती।जवानी के जंगी बेड़े और उस पर उमड़ती तमाम जिज्ञासाओं को अक्षरों में अंकित करती। पान की पीकों से गंगा मेला मनाती। कम्पू की किताब’ प्रत्यक्ष प्रकट हुई।#टेम्पो_हाई_है#Tempo_h...