ब्लॉगसेतु

jaikrishnarai tushar
0
चित्र साभार गूगलएक ग़ज़ल-चटख मौसम,किताबें,फूल चटख मौसम,किताबें,फूल,कुछ किस्सा,कहानी हैमोहब्बत भी किसी बहते हुए दरिया का पानी हैनहीं सुनती ,नहीं कुछ बोलती ये चाँदनी गूँगीमगर जूड़े में बैठी गूँथकर ये रात रानी हैसफ़र में थक के मैं पीपल के नीचे लेट जाता हूँदिए कि लौ म...
jaikrishnarai tushar
0
 चित्र साभार गूगलएक ग़ज़ल-मैंने जो दी हैकिताबें उन्हें सादा रखनाख़्वाब मत देखना,और मुझको दिखाना भी नहींखुल गयी आँख मेरी नींद अब आना भी नहींमैंने जो दी है किताबें उन्हें सादा रखनामोर के पंख ,कोई फूल सजाना भी नहींआँख में कितना है पानी जरा देखूँ उसकेमेरे आने की ख़बर...
अमितेश कुमार
0
इस ब्लॉग पर रंगमंच के शोधार्थी, छात्र और अध्यापक आते रहते हैं. उनकी सुविधा के लिए नाटक और रंगमंच संबंधी हिंदी और अंग्रेजी की कुछ उपयोगी पुस्तकों की सूची लगाई जा रही है. उम्मीद है इससे आपको लाभ होगा. सुझावों का स्वागत है. इस सूची को अद्यतन भी किया जाएगा. धन्यवाद.&nb...
 पोस्ट लेवल : किताबें Books
अनीता सैनी
0
 राह जीवन की सुलभ बनातीं,  सद्बुद्धि का आधार किताबें,  गहन निराशा में गमन करातीं,   उम्मीद का थामे हाथ किताबें। क्रूर दानव को मानव बनातीं, चेतन मन का शृंगार किताबें, मधुर शब्दों का मोहक संगम, सुधी पर शीतल बौछार...
Yashoda Agrawal
0
ज़िंदगी से मेरी, उनका जाना हुआअपनी मजबूरियों का बहाना हुआराह जब से हमारी जुदा हो गईबीच अपनों के रहकर बेगाना हुआबढ़ गयी हैं मेरी अब परेशानियाँजब से गैरों के घर आना जाना हुआहै कठिन दौर ये, ऐ खुदा सब्र देनेकियों का चलन अब पुराना हुआजाने अल्लाह को क्या है मंज़ूर अबफिर तुम...
Yashoda Agrawal
0
दर्द इतना कहाँ से उठता है।ये समझ लो की जाँ से उठता है।सबसे आँखें चुरा रहा था मैगम मगर अब जुबां से उठता है।वो असर एक दिन दिखायेगाशब्द जो भी जुबां से उठता है।दिल गुनाहों से भर गया सबकाअब भरोसा जहाँ से उठता है।आग लालच की खा गयी सबकोअब धुआँ हर मकाँ से उठता है।याद किरदा...
Hari Mohan Gupta
0
     हेमू अथवा हेमराज मध्य युग के इतिहास में विशेष स्थान रखते हैं , एन. के. स्मिथ. , एल. पी. शर्मा की शोध के अनुसार हेमू वैश्य वर्ग से थे और आदिलशाह की मृत्यु के पश्चात वे दिल्ली की गद्दी पर बैठे l हेमू को न्याय प्रिय होने के कारण विक्रमादित्य क...
 पोस्ट लेवल : किताबें Books
ANITA LAGURI (ANU)
0
दीदी!क्या गलती थी मेरीपूछना चाहती हूँ आजजन्म तुम्हारे बाद हुआइसमें मेरा क्या कसूरबाबा की अँगुलीथामी  तुमने  तुम्हारी मैंनेहर चीज़ तुम्हारे बाद मिली मुझेकिताबें तुम्हारीक़लमें तुम्हारीबस जिल्द  नयी लगा दी जातीकिताबों पर तुम्हारे...
Yashoda Agrawal
0
वो छुपाते रहे अपना दर्दअपनी परेशानियाँयहाँ तक किअपनी बीमारी भी….वो सोखते रहे परिवार का दर्दकभी रिसने नहीं दियावो सुनते रहे हमारी शिकायतेंअपनी सफाई दिये बिना ….वो समेटते रहेबिखरे हुये पन्नेहम सबकी ज़िंदगी के …..हम सब बढ़ते रहेउनका एहसान माने बिनाउन पर एहसान जताते हुये...
शिवम् मिश्रा
0
बहुत साल पहिले एगो सिनेमा बना था “यादें”. सुनील दत्त साहब का सिनेमा अऊर ऊ सिनेमा का खासियत एही था कि उसमें उनके अलावा कोनो कलाकार नहीं था. गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स में भी ई सिनेमा सबसे कम कलाकार वाला सिनेमा के लिये दर्ज है. दत्त साहब खुद एक बार बताए थे कि एक र...