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sanjiv verma salil
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शारद वंदन(मात्रिक लौकिक जातीयवर्णिक सुप्रतिष्ठा जातीयनवाविष्कृत आशाकिरण छंद)सूत्र - त ल ल।*मैया नमनचाहूँ अमन...   ऊषा विहँस   आ सूर्य सँग   आकाश रँग   गाए यमन...पंछी हुलसबोलें सरसझूमे धरणिनाचे गगन...   माँ! हो सदय&n...
आदित्य सिन्हा
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किरण हूँ मैं, कंचन है दिल मेरा  संसार में सब से पृथक,शीतल तरु की छाँव हो तुम,उष्म हवा को क्षीण करते, सावन की फुहार हो तुम , क्षितिज पर फैली अरुणिमा जैसे,सुनहरे कल का संवाद लिए ,तुम्हारे होने का आभास ही,      &nbsp...
Bharat Tiwari
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परिपक्व हिंदी कहानी काई— उषाकिरण खानएक दिन विपिन ने कहा था - ‘‘इजोतिया को तुम क्यों नहीं अपनी एकआध चोली दे देती हो? तुम्हारे नाप का ही तो आयेगा।’’‘‘वह पहनना ही नहीं चाहती है शैतान। कहती है बंधन-सा लगता है। लेकिन तुम उसके नाप के बारे में कैसे कह सकते हो? क्या ब...
Bharat Tiwari
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Raj Jat Yatra Ki Bheden मार्मिक और सच्चे लेखन से तर किरण सिंह की कहानी 'राजजात यात्रा की भेड़ें' किरण सिंह के साहित्य लेखन में वह कुछ है जो इस पाठक को हर बार झकझोर देता है. इस पाठक को लगता है कि वह अगर फिल्म निर्माण करता तो अवश्य किरण सिंह के लिखे की फिल्म...
मुकेश कुमार
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खिलखिलाहट से परेरुआंसे व्यक्ति की शायद बन जाती है पहचान,उदासियों में जब ओस की बूंदों सेछलक जाते हों आंसूतो एक ऊँगली पर लेकर उनकोये कहना, कितना उन्मत लगता है नाकि इस बूंद की कीमत तुम क्या जानो, लड़की!खिलखिलाते हुए जब भी तुमने कहामेरी पहचान तुम से है बाबूमैंने बस उस स...
sanjay krishna
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हिंदी-मैथिली की वरिष्ठ लेखिका उषाकिरण खान अपने नए उपन्यास अगनहिंडोला पर चर्चा कर रही थीं। बातचीत कर रहे थे रांची दूरदर्शन के पूर्व निदेशक प्रमोद कुमार झा। नई-नई जानकारियों के वर्क खुल रहे थे। महज पांच साल के शासन काल में शेरशाह सूरी ने क्या इतिहास रचा था? इस छो...
sanjiv verma salil
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* पर्यावरण विमर्श:जीवनदात्री वनस्पति -प्रो. किरण श्रीवास्तव, रायपुरजैविक सत्ता के चारों ओर परिवेश की संज्ञा पर्यावरण है। विश्व के सब ओर परिव्याप्त महाकाश के अभिन्न अंग वायु, प्रकाश, ध्वनि, जल तथा शून्य का समन्वय ही पर्यावरण है। ब्रम्हांड के जीव-जंतुओं की पारस्...
Yashoda Agrawal
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पति की व्यस्तता से परेशान पत्नी किट्टी पार्टी तो कभी महिला मंडल की सदस्य बन मॉडर्न होने का दंभ भरते हुए समय व्यतीत कर रही थी। बच्चे पहले ही पंख लगा घोंसले से फुर्र हो चुके थे। मॉडर्न पत्नी एकाएक इस जीवनशैली से ऊबने लगी। डूबते का सहारा ऊपरवाले, सो उसने भगवान की भक्त...
Tejas Poonia
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कोई औरत कब पूरी होती है ? इसका अंदाजा लगाना हो तो आप सुरेन्द्र वर्मा के लिखे इस नाटक को पढ़ लीजिए और अगर पढ़ने में आनंद नहीं आता तो कम से कम इस फिल्म को देख लीजिए । सुरेन्द्र वर्मा ने यह नाटक ‘सूर्य की अंतिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक’ 1975 में लिखा था जिसे आज तक...
Yashoda Agrawal
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अपने बचपन का सफ़र याद आयामुझको परियों का नगर याद आयाजो नहीं था कभी मेरा अपनाक्यूँ मुझे आज वो घर याद आयाकोई पत्ता न हिले जिसके बिनारब वही शामो ए सहर याद आयाइतना शातिर वो हुआ है कैसेहै सियासत का असर याद आयारोज़ क्यूँ सुर्ख़ियों में रहता हैहै यही उसका हुनर याद आयाजब...